The Shadow in My Room – मेरे कमरे में छिपी परछाई

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कभी-कभी डरावनी चीजें किसी सुनसान जंगल या पुरानी हवेली में नहीं, बल्कि हमारे अपने घर में छिपी होती हैं। हम जिस कमरे में हर रात चैन से सोते हैं, अगर उसी कमरे में कोई ऐसी चीज मौजूद हो जिसे हम देख नहीं सकते, तो क्या होगा?

यह कहानी है निखिल की, जिसने अपने नए कमरे में एक ऐसी परछाई देखी, जिसका रहस्य उसकी कल्पना से भी ज्यादा खतरनाक था।

पहली रात का अजीब अनुभव

निखिल हाल ही में नौकरी के लिए जयपुर आया था। रहने के लिए उसने एक पुरानी बिल्डिंग में कमरा किराए पर लिया। कमरा छोटा था, लेकिन किराया कम होने के कारण उसने उसे पसंद कर लिया।

पहली रात वह देर तक मोबाइल चलाता रहा। लगभग रात के एक बजे उसने मोबाइल बंद किया और सोने की कोशिश करने लगा।

तभी उसे दीवार पर एक परछाई दिखाई दी।

निखिल ने सोचा कि शायद बाहर लगी स्ट्रीट लाइट की रोशनी होगी। उसने खिड़की बंद कर दी, लेकिन परछाई गायब नहीं हुई।

वह परछाई किसी लंबे आदमी जैसी थी, जो दीवार के कोने में खड़ा था।

निखिल ने तुरंत लाइट जलाई। दीवार खाली थी।

उसने कमरे की जाँच की और फिर सो गया। अगली सुबह उसे रात की घटना एक सपना लगी।

लेकिन अगली रात वही परछाई फिर दिखाई दी।

इस बार वह दीवार के कोने में नहीं, बल्कि उसके बिस्तर के ठीक सामने खड़ी थी।

परछाई जो हिलती नहीं थी

निखिल ने ध्यान से देखा। परछाई का सिर थोड़ा झुका हुआ था और उसके हाथ असामान्य रूप से लंबे दिखाई दे रहे थे।

उसने मोबाइल की टॉर्च जलाई।

परछाई गायब हो गई।

जैसे ही उसने टॉर्च बंद की, वह फिर सामने आ गई।

निखिल डरकर कमरे से बाहर भागा और मकान मालिक के दरवाजे पर दस्तक देने लगा। कुछ देर बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने दरवाजा खोला।

“क्या हुआ?” उन्होंने पूछा।

निखिल ने उन्हें पूरी घटना बताई।

मकान मालिक का चेहरा सुनते ही गंभीर हो गया।

“तुम्हारे कमरे में ऐसा पहले भी हुआ है?” निखिल ने पूछा।

बुजुर्ग ने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा, “उस कमरे में पहले एक आदमी रहता था। वह कई साल पहले अचानक गायब हो गया। उसके बाद वहाँ कोई ज्यादा दिन नहीं रुका।”

“लेकिन आपने मुझे यह बात पहले क्यों नहीं बताई?”

मकान मालिक ने नजरें झुका लीं।

“मुझे लगा था कि अब वहाँ सब ठीक है।”

निखिल ने उसी रात कमरा छोड़ने का फैसला किया, लेकिन बाहर तेज बारिश होने के कारण उसे सुबह तक रुकना पड़ा।

उसे नहीं पता था कि अगली रात उसे उस परछाई का असली रहस्य पता चलने वाला था।

आधी रात का संदेश

रात के 12:30 बजे निखिल अपने बिस्तर पर बैठा था। उसने कमरे की सारी लाइटें जला रखी थीं।

तभी उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया।

“लाइट बंद कर दो। वह तुम्हें देखना चाहता है।”

निखिल ने तुरंत नंबर पर कॉल किया, लेकिन फोन बंद था।

उसने खिड़की से बाहर देखा। सड़क खाली थी। आसपास की बिल्डिंगों में भी ज्यादातर लाइटें बंद थीं।

तभी कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं।

निखिल का दिल तेजी से धड़कने लगा।

दीवार पर वही परछाई दिखाई दी। इस बार वह धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रही थी।

निखिल ने दरवाजे की तरफ दौड़ने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा नहीं खुला।

परछाई उसके सामने आकर रुक गई।

फिर कमरे में एक धीमी आवाज गूँजी।

“मेरी जगह पर क्यों सो रहे हो?”

निखिल ने काँपते हुए पूछा, “तुम कौन हो?”

परछाई ने जवाब नहीं दिया। उसके पीछे की दीवार पर कुछ शब्द उभरने लगे।

“आईने के पीछे देखो।”

आईने के पीछे क्या था?

निखिल ने कमरे में लगे पुराने आईने की तरफ देखा। उसने पहले कभी उस आईने पर ध्यान नहीं दिया था।

वह धीरे-धीरे उसके पास गया और आईने को दीवार से हटाया।

पीछे एक छोटा-सा कागज चिपका हुआ था। उस पर एक नाम और तारीख लिखी थी।

अमित वर्मा — 17 जुलाई 2018।

निखिल ने मकान मालिक को फोन किया और उस नाम के बारे में पूछा।

बुजुर्ग ने बताया कि अमित उसी कमरे में रहने वाला पिछला किरायेदार था। वह एक रात अचानक गायब हो गया था। पुलिस ने कई दिनों तक तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।

निखिल ने कागज पलटा। पीछे छोटे अक्षरों में लिखा था—

“अगर मेरी परछाई तुम्हें दिखाई दे, तो उसे अपने पास मत आने देना।”

अचानक आईने में निखिल का प्रतिबिंब मुस्कुराने लगा।

लेकिन निखिल मुस्कुरा नहीं रहा था।

उसने पीछे मुड़कर देखा। कमरे में कोई नहीं था। फिर आईने की तरफ देखा तो प्रतिबिंब अब भी मुस्कुरा रहा था।

प्रतिबिंब ने अपना हाथ उठाया और आईने के अंदर से काँच पर थपथपाया।

ठक... ठक... ठक...

निखिल पीछे हट गया।

आईने में दिखाई देने वाले उसके प्रतिबिंब ने धीरे-धीरे अपना मुँह खोला और कहा, “अब तुम्हारी बारी है।”

अगले ही पल आईना टूटकर जमीन पर गिर गया।

कमरे में पूरी तरह अंधेरा छा गया।

अगली सुबह का रहस्य

अगली सुबह मकान मालिक कमरे में पहुँचे तो दरवाजा खुला हुआ था। निखिल वहाँ नहीं था। उसका सामान, मोबाइल और कपड़े सब कमरे में मौजूद थे।

लेकिन दीवार पर एक नई परछाई दिखाई दे रही थी।

वह बिल्कुल निखिल जैसी थी।

पुलिस को कमरे से कोई सुराग नहीं मिला। मकान मालिक ने कुछ ही दिनों बाद कमरा बंद कर दिया।

कई महीने बाद एक नया किरायेदार उस बिल्डिंग में रहने आया। उसे कमरे की दीवार पर एक लंबा, काला निशान दिखाई दिया।

पहली रात उसने उसे अनदेखा किया।

लेकिन रात के बारह बजे दीवार से दस्तक की आवाज आने लगी।

ठक... ठक... ठक...

फिर अंधेरे में एक आवाज गूँजी।

“क्या तुमने मेरी परछाई देखी है?”

अगर आपको real horror story in hindi जैसी रहस्यमयी कहानियाँ पसंद हैं, तो इस कहानी का अंत आपको सोचने पर मजबूर कर सकता है। ऐसी ही रोमांचक horror story in hindi उन पाठकों को पसंद आती हैं जिन्हें अजीब घटनाओं और अनसुलझे रहस्यों में दिलचस्पी है।

और अगर आप डर, रहस्य, रोमांच तथा अन्य विषयों पर नई कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं, तो unexpected stories पर ऐसी ही दिलचस्प कहानियाँ खोज सकते हैं।

आपकी राय: अगर आपके कमरे का आईना आपको ऐसी चीज दिखाए जो वास्तविकता में मौजूद न हो, तो क्या आप उस आईने को तोड़ देंगे या उसके पीछे छिपा रहस्य जानने की कोशिश करेंगे?

नोट: यह कहानी काल्पनिक है और मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है।

 

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