The Shop That Sold Memories – वह दुकान जहाँ यादें बिकती थीं
निशांत अपने जीवन की कुछ यादें भूल जाना चाहता था।
एक दिन पुराने बाज़ार में उसे एक छोटी दुकान दिखाई दी।
बोर्ड पर लिखा था—
"यहाँ यादें खरीदी और बेची जाती हैं।"
दुकान के अंदर एक बूढ़ा आदमी बैठा था।
निशांत ने हँसते हुए पूछा—
"क्या सच में यादें खरीदी जा सकती हैं?"
बूढ़े ने जवाब दिया—
"अगर तुम कीमत देने को तैयार हो।"
पहली याद
निशांत ने अपनी एक दुखद याद मिटाने की इच्छा जताई।
बूढ़े ने पूछा—
"कौन-सी याद?"
निशांत ने बताया कि उसे अपने छोटे भाई की मृत्यु का दृश्य बार-बार याद आता है।
बूढ़े ने एक काँच की बोतल निकाली।
उसमें हल्की नीली रोशनी चमक रही थी।
उसने कहा—
"यह याद अब तुम्हारी नहीं रहेगी। लेकिन बदले में तुम्हें एक और याद देनी होगी।"
निशांत ने हामी भर दी।
खालीपन
अगली सुबह निशांत उठा तो उसे अपने भाई की मृत्यु याद नहीं थी।
उसका मन हल्का था।
लेकिन जब उसने परिवार की पुरानी तस्वीरें देखीं, तो वह चौंक गया।
उसे अपने भाई का चेहरा भी याद नहीं आ रहा था।
उसने माँ से पूछा—
"यह लड़का कौन है?"
माँ की आँखें भर आईं।
"तुम्हारा छोटा भाई।"
निशांत ने तस्वीर दोबारा देखी।
उसे कुछ महसूस नहीं हुआ।
दूसरी बोतल
कुछ दिनों बाद निशांत को अपनी माँ का जन्मदिन याद नहीं रहा।
फिर उसे अपने बचपन का घर याद नहीं आया।
वह घबराकर उसी दुकान पर पहुँचा।
बूढ़े ने कहा—
"तुमने एक याद दी थी। उसकी जगह दूसरी याद चली गई।"
निशांत ने गुस्से में पूछा—
"तुमने कहा था कि सिर्फ़ एक याद मिटेगी!"
बूढ़ा मुस्कुराया।
"यादें अकेली नहीं रहतीं। एक को निकालो, तो उससे जुड़ी दूसरी भी जाने लगती हैं।"
अपनी पहचान
निशांत ने अपनी यादें वापस माँगीं।
बूढ़े ने एक बड़ी बोतल मेज़ पर रखी।
उसमें बहुत-सी छोटी रोशनियाँ थीं।
"सब वापस चाहिए तो अपनी सबसे कीमती याद देनी होगी।"
निशांत ने पूछा—
"कौन-सी?"
बूढ़े ने कहा—
"वह याद, जिसमें तुम पहली बार किसी से प्यार करते हो।"
निशांत को अपनी पत्नी की याद आई।
वह उस दिन को कभी नहीं भूलना चाहता था, जब दोनों पहली बार मिले थे।
उसने मना कर दिया।
दुकान का असली मालिक
निशांत दुकान से बाहर निकलने लगा।
तभी उसने दीवार पर लगी एक पुरानी तस्वीर देखी।
तस्वीर में बूढ़ा दुकानदार खड़ा था।
उसके साथ एक छोटा बच्चा था।
वह बच्चा निशांत जैसा दिखता था।
तस्वीर के पीछे लिखा था—
"निशांत और उसके पिता।"
निशांत को याद आया कि उसके पिता बचपन में ही गायब हो गए थे।
उसने बूढ़े से पूछा—
"क्या आप मेरे पिता हैं?"
बूढ़े ने जवाब नहीं दिया।
उसने सिर्फ़ एक बोतल निशांत की तरफ बढ़ा दी।
बोतल के अंदर उसकी माँ की आवाज़ थी—
"बेटा, घर कब लौटोगे?"
निशांत दुकान से बाहर निकला।
लेकिन बाज़ार में अब कोई दुकान नहीं थी।
उसने अपने घर का रास्ता ढूँढ़ने की कोशिश की।
उसे अपनी पत्नी का नाम याद नहीं आ रहा था।
अपने घर का पता भी नहीं।
उसकी जेब में एक पर्ची मिली।
उस पर लिखा था—
"तुमने अपनी आखिरी याद भी बेच दी।"
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क्या दर्दनाक यादों को मिटाकर इंसान सच में खुश रह सकता है?
क्योंकि कुछ horror story in hindi हमें बताती हैं कि यादें सिर्फ़ दर्द नहीं देतीं...
वे हमें बताते हैं कि हम कौन हैं।
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