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  • The Shop That Sold Memories – वह दुकान जहाँ यादें बिकती थीं
    निशांत अपने जीवन की कुछ यादें भूल जाना चाहता था। एक दिन पुराने बाज़ार में उसे एक छोटी दुकान दिखाई दी। बोर्ड पर लिखा था— "यहाँ यादें खरीदी और बेची जाती हैं।" दुकान के अंदर एक बूढ़ा आदमी बैठा था। निशांत ने हँसते हुए पूछा— "क्या सच में यादें खरीदी जा सकती हैं?" बूढ़े ने जवाब दिया— "अगर तुम कीमत देने को तैयार हो।"     पहली याद निशांत ने अपनी एक दुखद याद मिटाने की इच्छा...
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  • The Letter Delivered After Fifty Years – पचास साल बाद आया खत
    अभिषेक अपने दादाजी का पुराना घर साफ़ कर रहा था। घर में बहुत-सी पुरानी किताबें और तस्वीरें थीं। अलमारी के पीछे उसे एक पीला लिफाफा मिला। उस पर उसके दादाजी का नाम लिखा था। लिफाफे पर डाक की मुहर लगी थी। लेकिन तारीख देखकर अभिषेक हैरान रह गया। यह खत पचास साल पहले भेजा गया था। उसने लिफाफा खोला। अंदर सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी— "मैं आज रात घर लौट रही हूँ। दरवाज़ा खुला रखना।"     दादाजी...
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  • The Child in the Hospital Corridor – अस्पताल के गलियारे में खड़ा बच्चा
    डॉ. नीलिमा एक पुराने अस्पताल में रात की ड्यूटी करती थीं। अस्पताल में एक लंबा गलियारा था, जिसके आखिरी छोर पर कमरा नंबर 17 था। वह कमरा कई वर्षों से बंद था। हर रात करीब तीन बजे नीलिमा को वहाँ एक छोटा बच्चा खड़ा दिखाई देता। वह अस्पताल की सफेद पोशाक पहने रहता। और हर बार एक ही सवाल पूछता— "डॉक्टर, मेरी माँ कब आएँगी?"     खाली गलियारा पहली बार नीलिमा ने सोचा कि शायद कोई बच्चा अपने...
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  • The House That Called My Name – वह घर जो मेरा नाम पुकारता था
    आदित्य अपने ऑफिस से रोज़ देर रात लौटता था। उसके घर के रास्ते में एक पुराना मकान पड़ता था। मकान कई सालों से खाली था। उसकी खिड़कियाँ टूटी हुई थीं। दरवाज़े पर जंग लगा ताला था। लेकिन हर रात जब आदित्य वहाँ से गुजरता, अंदर से कोई उसका नाम पुकारता— "आदित्य..." पहले उसने इसे हवा की आवाज़ समझा। फिर एक रात आवाज़ ने उसका पूरा नाम लिया। "आदित्य मेहरा, घर आ जाओ।"     घर के अंदर की रोशनी...
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  • The Last Call from My Mother – माँ का आखिरी फोन
    रोहन शहर में नौकरी करता था। उसकी माँ गाँव में अकेली रहती थीं। रोहन रोज़ रात को उनसे फोन पर बात करता था। एक रात उसकी माँ ने फोन उठाते ही कहा— "बेटा, आज घर जल्दी आ जाना।" रोहन ने हँसकर पूछा— "क्यों माँ?" माँ ने धीमी आवाज़ में कहा— "घर में कोई मेरे साथ रहता है।" रोहन ने समझा कि माँ डर गई होंगी। उसने अगले दिन गाँव आने का वादा किया।     रात के दो बजे रोहन सोने ही वाला था...
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  • The Shadow in the School Bus – स्कूल बस में बैठी परछाई
    पूजा हर सुबह अपनी बेटी अनाया को स्कूल बस में बैठाती थी। बस में करीब बीस बच्चे थे। ड्राइवर के पीछे वाली सीट हमेशा खाली रहती थी। एक दिन अनाया स्कूल से लौटकर बहुत परेशान थी। पूजा ने पूछा— "क्या हुआ बेटा?" अनाया ने कहा— "मम्मी, आज बस में एक और बच्चा था।" पूजा ने मुस्कुराकर पूछा— "तो इसमें डरने की क्या बात है?" अनाया ने धीरे से जवाब दिया— "वह बच्चा किसी की आँखों में दिखाई...
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  • The Girl from Platform Zero – प्लेटफॉर्म ज़ीरो पर खड़ी लड़की
    रात के करीब एक बजे विक्रम अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। स्टेशन लगभग खाली था। आखिरी ट्रेन निकल चुकी थी। तभी उसे दूर एक लड़की दिखाई दी। वह लाल रंग की फ्रॉक पहने प्लेटफॉर्म के आखिरी छोर पर खड़ी थी। विक्रम उसके पास गया और पूछा— "तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो?" लड़की ने उसकी तरफ देखा। फिर धीरे से बोली— "मैं अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रही हूँ।" विक्रम ने स्टेशन की घड़ी देखी। रात के एक...
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  • The Shadow Outside My Window – मेरी खिड़की के बाहर खड़ी परछाई
    कबीर एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता था। उसके कमरे की खिड़की सामने वाली इमारत की तरफ खुलती थी। हर रात ठीक 11:45 बजे उसे खिड़की के बाहर एक परछाई दिखाई देती। पहले उसने सोचा कि शायद किसी पेड़ की शाखा होगी। लेकिन एक रात उसने ध्यान से देखा। परछाई किसी इंसान की थी। लंबी। बिल्कुल स्थिर। और उसका चेहरा सीधे कबीर की खिड़की की तरफ था।     हर रात वही समय कबीर ने कई दिनों तक उस परछाई को देखा। वह...
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  • The Train That Stopped at No Station – वह ट्रेन जो किसी स्टेशन पर नहीं रुकती थी
    रात के करीब बारह बजे रोहित दिल्ली से अपने घर लौट रहा था। आखिरी मेट्रो निकल चुकी थी। स्टेशन पर सिर्फ़ कुछ लोग बचे थे। तभी प्लेटफॉर्म पर एक अनाउंसमेंट हुई— "अगली ट्रेन कुछ ही देर में प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर आएगी।" रोहित हैरान था। प्लेटफॉर्म नंबर तीन तो पिछले दो साल से बंद था। उसने वहाँ देखा। अँधेरे के बीच एक ट्रेन धीरे-धीरे उसकी तरफ आ रही थी। उसकी खिड़कियों में कोई रोशनी नहीं थी। और...
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  • Coach Number 13 – डिब्बा नंबर 13 का यात्री
    सौरभ रात की ट्रेन से अकेला सफर कर रहा था। उसकी सीट कोच नंबर 13 में थी। ट्रेन लगभग खाली थी। रात 1 बजे एक आदमी उसके सामने आकर बैठ गया। उसने कहा— "यह सीट मेरी है।" सौरभ ने टिकट देखा। उसकी सीट भी वही थी।     दो टिकट सौरभ ने अपना टिकट दिखाया। आदमी ने जेब से टिकट निकाला। दोनों टिकटों पर एक ही सीट नंबर था। लेकिन उस आदमी के टिकट की तारीख... दस साल पुरानी थी।     ट्रेन की...
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