The Shadow in the School Bus – स्कूल बस में बैठी परछाई

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पूजा हर सुबह अपनी बेटी अनाया को स्कूल बस में बैठाती थी।

बस में करीब बीस बच्चे थे।

ड्राइवर के पीछे वाली सीट हमेशा खाली रहती थी।

एक दिन अनाया स्कूल से लौटकर बहुत परेशान थी।

पूजा ने पूछा—

"क्या हुआ बेटा?"

अनाया ने कहा—

"मम्मी, आज बस में एक और बच्चा था।"

पूजा ने मुस्कुराकर पूछा—

"तो इसमें डरने की क्या बात है?"

अनाया ने धीरे से जवाब दिया—

"वह बच्चा किसी की आँखों में दिखाई नहीं देता था।"

 


 

खाली सीट पर कौन बैठता था?

अगले दिन पूजा ने बस के अंदर ध्यान से देखा।

ड्राइवर के पीछे वाली सीट खाली थी।

लेकिन सीट का कपड़ा दबा हुआ था।

जैसे कोई वहाँ बैठा हो।

उसने ड्राइवर से पूछा—

"इस सीट पर कौन बैठता है?"

ड्राइवर ने शीशे में देखा।

फिर अचानक ब्रेक लगा दिया।

उसने कहा—

"मैडम, इस सीट पर कोई नहीं बैठता।"

लेकिन पूजा ने साफ़ देखा था कि सीट पर एक छोटी-सी परछाई बनी हुई थी।

 


 

बस की पुरानी तस्वीर

पूजा ने स्कूल के कार्यालय में बस का रिकॉर्ड देखा।

उसे पता चला कि कई साल पहले इसी रूट पर एक बच्चा स्कूल से लौटते समय गायब हो गया था।

उसका नाम विवान था।

उसकी माँ ने बताया था कि वह रोज़ ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर बैठता था।

लेकिन एक दिन बस घर पहुँची तो विवान उसमें नहीं था।

वह फिर कभी नहीं मिला।

पूजा ने अनाया को उस बच्चे की तस्वीर दिखाई।

अनाया ने तुरंत कहा—

"मम्मी, यही बच्चा रोज़ मेरे पास बैठता है।"

 


 

खिड़की पर छोटे हाथ

अगली सुबह पूजा बस के पीछे अपनी कार लेकर चली।

बस एक मोड़ पर पहुँची।

तभी अनाया ने खिड़की पर हाथ रखा।

उसके बगल में एक दूसरा छोटा हाथ भी दिखाई दिया।

पूजा ने अपनी कार रोक दी।

उसने बस के अंदर देखा।

अनाया अकेली बैठी थी।

लेकिन खिड़की पर दो बच्चों के हाथों के निशान थे।

 


 

बच्चे की आखिरी बात

उस शाम अनाया ने बताया कि विवान उससे रोज़ एक ही सवाल पूछता है—

"क्या तुमने मेरी माँ को देखा है?"

अनाया ने उसे बताया कि वह अपनी माँ से मिल सकती है।

लेकिन विवान ने सिर हिलाया।

उसने कहा—

"मैं बस से उतर नहीं सकता। जब तक कोई मुझे पहचानकर बुलाएगा नहीं, मैं यहीं रहूँगा।"

पूजा ने स्कूल की मदद से विवान की माँ को ढूँढ़ लिया।

अगले दिन वह बस स्टॉप पर आई।

उसने बस की खाली सीट की तरफ देखकर कहा—

"विवान, घर चलो बेटा। मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ।"

 


 

आखिरी सफर

उसी समय बस के अंदर एक बच्चे की हँसी सुनाई दी।

ड्राइवर के पीछे वाली सीट धीरे-धीरे सीधी हो गई।

खिड़की पर बने छोटे हाथों के निशान गायब हो गए।

विवान की माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।

उसने पूजा का हाथ पकड़कर धन्यवाद कहा।

लेकिन उस रात पूजा को अनाया के कमरे से आवाज़ सुनाई दी।

अनाया नींद में किसी से बात कर रही थी।

पूजा ने पास जाकर पूछा—

"किससे बात कर रही हो?"

अनाया ने आँखें बंद रखते हुए कहा—

"मम्मी, विवान चला गया। लेकिन उसने कहा है कि कल उसका दोस्त आएगा।"

अगली सुबह बस में वही सीट फिर दब गई थी।

अगर आप real horror story in hindi जैसी कहानियाँ पसंद करते हैं, तो स्कूल बस की यह घटना आपको भी सोचने पर मजबूर करेगी।

क्योंकि कभी-कभी कोई परछाई डराने नहीं आती...

वह सिर्फ़ किसी अपने का इंतज़ार कर रही होती है।

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पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
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