The Diary That Predicted Death – मौत की तारीख लिखने वाली डायरी
साहिल को पुरानी चीज़ें इकट्ठा करने का शौक था।
एक दिन उसे पुराने बाज़ार में चमड़े के कवर वाली एक डायरी मिली।
दुकानदार ने उसे डायरी बेचने से पहले चेतावनी दी—
"इसे पढ़ना, लेकिन इसमें कुछ लिखना मत।"
साहिल हँस पड़ा।
उसने डायरी खरीद ली।
घर पहुँचकर उसने पहला पन्ना खोला।
उस पर एक वाक्य लिखा था—
"हर इंसान की आखिरी तारीख पहले से लिखी जा चुकी है।"
पहला नाम
साहिल ने अगले पन्ने पलटे।
कई नाम और तारीखें लिखी थीं।
उसने एक नाम पहचाना।
वह उसके पड़ोसी मिश्रा अंकल का नाम था।
नाम के सामने अगले दिन की तारीख लिखी थी।
साहिल ने सोचा कि किसी ने मज़ाक किया होगा।
लेकिन अगली सुबह पड़ोस से खबर आई कि मिश्रा अंकल की रात में मृत्यु हो गई थी।
साहिल के हाथ से डायरी गिरते-गिरते बची।
अगला नाम
उसने घबराकर डायरी खोली।
अगले पन्ने पर उसके ऑफिस के सहकर्मी का नाम था।
तारीख दो दिन बाद की थी।
साहिल ने तुरंत अपने सहकर्मी को फोन किया।
उसे डायरी के बारे में बताने की हिम्मत नहीं हुई।
उसने सिर्फ़ कहा—
"अगले दो दिन सावधान रहना।"
सहकर्मी हँसकर बोला—
"तुम भविष्यवक्ता कब से बन गए?"
दो दिन बाद ऑफिस में एक दुर्घटना हुई।
सहकर्मी की जान नहीं बच सकी।
साहिल अब समझ चुका था कि डायरी सामान्य नहीं थी।
अपना नाम
उस रात साहिल ने डायरी का हर पन्ना पलटा।
आखिरी पन्ने पर उसका नाम लिखा था।
उसके सामने अगले दिन की तारीख थी।
नीचे एक और वाक्य था—
"जिसने यह तारीख पढ़ ली, वह इसे बदलने की कोशिश करेगा।"
साहिल ने डायरी बंद कर दी।
उसने तय किया कि वह अगले दिन घर से बाहर नहीं निकलेगा।
उसने दरवाज़े बंद किए।
खिड़कियों की कुंडियाँ जाँचीं।
और फोन अपने पास रखकर बैठ गया।
बंद घर में आवाज़
रात के करीब ग्यारह बजे दरवाज़े पर दस्तक हुई।
साहिल ने दरवाज़ा नहीं खोला।
बाहर से आवाज़ आई—
"डायरी वापस कर दो।"
साहिल ने पूछा—
"कौन हो?"
जवाब मिला—
"जिसने तुम्हारा नाम लिखा है।"
साहिल ने पुलिस को फोन करने की कोशिश की।
लेकिन फोन में नेटवर्क नहीं था।
तभी उसके कमरे में रखी डायरी अपने आप खुल गई।
उसमें एक नई लाइन दिखाई दी—
"मृत्यु का समय बदल गया है।"
तारीख बदल गई
साहिल ने काँपते हाथों से पन्ना पलटा।
अब उसके नाम के सामने आज की तारीख लिखी थी।
लेकिन नीचे एक और नाम उभरने लगा।
उसकी छोटी बहन रिया का नाम।
साहिल ने चीखकर डायरी बंद कर दी।
वह अपनी बहन को फोन करने लगा।
कॉल लग गई।
दूसरी तरफ से रिया ने कहा—
"भैया, दरवाज़े पर कोई आया है। कह रहा है कि वह आपको लेने आया है।"
साहिल ने चिल्लाकर कहा—
"दरवाज़ा मत खोलना!"
लेकिन कॉल अचानक कट गई।
आखिरी पन्ना
साहिल बहन के घर पहुँचा तो दरवाज़ा खुला था।
अंदर कोई नहीं था।
टेबल पर वही डायरी रखी थी।
उसने आखिरी पन्ना खोला।
अब उसके नाम के सामने कोई तारीख नहीं थी।
सिर्फ़ लिखा था—
"जिसने दूसरे की तारीख बदलने की कोशिश की, उसने अपनी कहानी पूरी कर दी।"
साहिल फिर कभी नहीं मिला।
कुछ दिनों बाद पुरानी किताबों की दुकान पर वही डायरी दोबारा दिखाई दी।
इस बार पहले पन्ने पर एक नया नाम लिखा था।
रिया।
अगर आपको real horror story in hindi पसंद है, तो यह कहानी एक डरावना सवाल छोड़ती है—
क्या भविष्य पहले से लिखा होता है, या उसे जानने की कोशिश ही उसे बदल देती है?
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