The Girl from Platform Zero – प्लेटफॉर्म ज़ीरो पर खड़ी लड़की
रात के करीब एक बजे विक्रम अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था।
स्टेशन लगभग खाली था।
आखिरी ट्रेन निकल चुकी थी।
तभी उसे दूर एक लड़की दिखाई दी।
वह लाल रंग की फ्रॉक पहने प्लेटफॉर्म के आखिरी छोर पर खड़ी थी।
विक्रम उसके पास गया और पूछा—
"तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो?"
लड़की ने उसकी तरफ देखा।
फिर धीरे से बोली—
"मैं अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रही हूँ।"
विक्रम ने स्टेशन की घड़ी देखी।
रात के एक बजकर तेरह मिनट हो रहे थे।
प्लेटफॉर्म नंबर कहाँ है?
विक्रम ने पूछा—
"तुम्हारी ट्रेन किस प्लेटफॉर्म पर आएगी?"
लड़की ने बिना कुछ कहे पीछे की तरफ इशारा किया।
वहाँ एक पुरानी सीढ़ी थी।
विक्रम ने उस स्टेशन पर कई साल काम किया था।
लेकिन उसने वह सीढ़ी पहले कभी नहीं देखी थी।
सीढ़ियों के ऊपर एक बोर्ड लगा था—
प्लेटफॉर्म 0
विक्रम हैरान रह गया।
स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर एक से छह तक थे।
प्लेटफॉर्म ज़ीरो का कोई रिकॉर्ड नहीं था।
पुरानी टिकट
लड़की ने विक्रम को एक टिकट दिया।
टिकट पर स्टेशन का नाम लिखा था।
लेकिन तारीख देखकर विक्रम के हाथ काँप गए।
वह टिकट बीस साल पुराना था।
उसने लड़की से पूछा—
"तुम्हारे पास यह टिकट कहाँ से आया?"
लड़की ने जवाब दिया—
"मेरे पापा ने दिया था।"
"तुम्हारे पापा कहाँ हैं?"
लड़की की आँखें भर आईं।
"वह ट्रेन में मेरा इंतज़ार कर रहे हैं।"
स्टेशन मास्टर का डर
विक्रम तुरंत स्टेशन मास्टर के कमरे में गया।
उसने लड़की और टिकट के बारे में बताया।
स्टेशन मास्टर ने टिकट देखते ही दराज़ बंद कर दी।
उसने कहा—
"उस लड़की से दूर रहो।"
विक्रम ने पूछा—
"आप उसे जानते हैं?"
स्टेशन मास्टर कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला—
"बीस साल पहले इसी स्टेशन पर एक बच्ची अपने पिता से बिछड़ गई थी। उस रात एक ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। दोनों कभी नहीं मिले।"
विक्रम ने पूछा—
"लेकिन वह बच्ची अब कहाँ है?"
स्टेशन मास्टर ने धीरे से जवाब दिया—
"हर साल उसी तारीख को वह वापस आती है।"
ट्रेन आ गई
विक्रम फिर सीढ़ियों के पास पहुँचा।
लड़की अब भी वहीं खड़ी थी।
अचानक नीचे से ट्रेन की आवाज़ आने लगी।
रेल की पटरियाँ काँपने लगीं।
एक पुरानी ट्रेन प्लेटफॉर्म ज़ीरो पर आकर रुकी।
उसके दरवाज़े खुल गए।
अंदर से एक आदमी की आवाज़ आई—
"गुड़िया, इस बार देर मत करना!"
लड़की मुस्कुराई।
उसने विक्रम का हाथ पकड़कर कहा—
"अंकल, आप भी चलोगे?"
विक्रम ने पीछे हटते हुए सिर हिला दिया।
लड़की ट्रेन में चढ़ गई।
दरवाज़े बंद हो गए।
और ट्रेन अँधेरे में गायब हो गई।
आखिरी टिकट
सुबह विक्रम ने स्टेशन मास्टर को सब बताया।
दोनों प्लेटफॉर्म ज़ीरो की तलाश में गए।
लेकिन वहाँ सिर्फ़ एक बंद दीवार थी।
कोई सीढ़ी नहीं थी।
कोई प्लेटफॉर्म नहीं था।
विक्रम ने अपनी जेब में हाथ डाला।
अंदर एक टिकट रखा था।
वह उसी ट्रेन का टिकट था।
उस पर आज की तारीख लिखी थी।
और यात्री का नाम था—
विक्रम शर्मा।
लोग ऐसी घटनाओं को real horror story in hindi जैसी कहानियों में पढ़ना पसंद करते हैं।
लेकिन विक्रम के लिए सबसे बड़ा सवाल यह था कि अगर प्लेटफॉर्म ज़ीरो था ही नहीं, तो वह ट्रेन कहाँ से आई थी?
अगर आपको horror story in hindi पसंद है, तो इस रहस्य का अंत आपको भी सोचने पर मजबूर कर सकता है।
क्योंकि कुछ unexpected stories में मंज़िल दिखाई नहीं देती...
लेकिन टिकट पहले ही कट चुका होता है।
पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected Stories.in
- Digital Agency
- Literie
- Location de voitures
- Restaurant
- Restaurant
- Mode
- Mode
- Information
- Marketing
- Tourisme
- Développement
- Découverte
- Législation
- Gastronomie
- Pâtisserie
- Evento
- Art
- Causes
- Crafts
- Dance
- Drinks
- Film
- Fitness
- Food
- Giochi
- Gardening
- Health
- Home
- Literature
- Music
- Networking
- Altre informazioni
- Party
- Religion
- Shopping
- Sports
- Theater
- Wellness