The Last Train – आखिरी ट्रेन में कौन बैठा था?

0
59

रात के सफर में सबसे डरावनी चीज़ हमेशा अंधेरा नहीं होता।

कभी-कभी डर उस इंसान से होता है जो आपके बिल्कुल पास बैठा हो।

राहुल को यह बात उस रात समझ आई जब उसे शहर के पुराने रेलवे स्टेशन से आखिरी ट्रेन पकड़नी पड़ी।

रात के करीब 11:50 बजे स्टेशन लगभग खाली हो चुका था।

प्लेटफॉर्म पर सिर्फ़ कुछ बंद दुकानें, पीली रोशनी वाले बल्ब और दूर खड़ी एक पुरानी ट्रेन दिखाई दे रही थी।

अनाउंसमेंट हुआ—

"प्लेटफॉर्म नंबर 3 से आखिरी ट्रेन कुछ ही मिनटों में रवाना होगी।"

राहुल ने अपना बैग उठाया और ट्रेन की तरफ बढ़ गया।

उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि उस रात वह ट्रेन उसे ऐसी जगह ले जाने वाली थी, जहाँ से लौटना आसान नहीं था।

 


 

आखिरी डिब्बा

ट्रेन में लगभग कोई यात्री नहीं था।

राहुल ने पहले डिब्बे में देखा।

कोई नहीं।

दूसरे डिब्बे में भी सिर्फ़ दो खाली सीटें थीं।

वह आगे बढ़ता गया।

आखिर में उसे एक डिब्बा मिला जिसमें एक आदमी खिड़की के पास बैठा था।

उसने काले रंग का पुराना कोट पहन रखा था।

चेहरा खिड़की की तरफ था।

राहुल ने सामने वाली सीट पर बैठते हुए पूछा—

"यह ट्रेन सेंट्रल स्टेशन जाएगी ना?"

आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया।

राहुल ने दोबारा पूछा।

इस बार आदमी ने धीरे से उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखें कुछ सेकंड तक राहुल को देखती रहीं।

फिर उसने कहा—

"अगर ट्रेन वहाँ पहुँची तो..."

राहुल कुछ समझ नहीं पाया।

 


 

टिकट पर लिखा हुआ नाम

ट्रेन चल पड़ी।

राहुल ने जेब से अपना टिकट निकाला।

उसी समय सामने बैठे आदमी ने उसकी तरफ देखा।

"आपका टिकट दिखाइए।"

राहुल ने टिकट उसकी तरफ बढ़ा दिया।

आदमी ने टिकट देखा और अचानक चुप हो गया।

उसने टिकट वापस करते हुए कहा—

"यह टिकट आपको नहीं मिलना चाहिए था।"

राहुल हँस पड़ा।

"क्यों?"

आदमी ने टिकट की तरफ इशारा किया।

राहुल ने ध्यान से देखा।

टिकट पर उसका नाम सही लिखा था।

लेकिन तारीख...

बारह साल पुरानी थी।

राहुल के चेहरे से मुस्कान गायब हो गई।

उसने तुरंत अपना मोबाइल निकाला।

मोबाइल में तारीख आज की थी।

फिर उसने टिकट देखा।

वही पुरानी तारीख।

 


 

ट्रेन अचानक रुक गई

करीब दस मिनट बाद ट्रेन अचानक रुक गई।

बाहर कोई स्टेशन नहीं था।

खिड़की के बाहर सिर्फ़ घना अंधेरा था।

राहुल ने घबराकर पूछा—

"ट्रेन क्यों रुक गई?"

सामने बैठा आदमी खिड़की से बाहर देखने लगा।

फिर उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—

"क्योंकि अब हम उस जगह पहुँच गए हैं।"

राहुल ने पूछा—

"कौन सी जगह?"

आदमी ने जवाब नहीं दिया।

तभी ट्रेन की सभी लाइटें बंद हो गईं।

पूरा डिब्बा अंधेरे में डूब गया।

कुछ सेकंड बाद पीछे वाले डिब्बे से किसी के दौड़ने की आवाज़ आने लगी।

धड़ाम...

धड़ाम...

धड़ाम...

जैसे कोई ट्रेन के अंदर भाग रहा हो।

 


 

वह आवाज़ किसकी थी?

राहुल ने मोबाइल की टॉर्च जलाई।

सामने वाली सीट खाली थी।

वह आदमी गायब हो चुका था।

राहुल तुरंत खड़ा हुआ।

"आप कहाँ गए?"

कोई जवाब नहीं आया।

तभी उसके पीछे से आवाज़ आई—

"वह तुम्हारे साथ नहीं आया था।"

राहुल ने पलटकर देखा।

डिब्बे का दरवाज़ा खुला था।

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

फिर वही आवाज़ दोबारा आई—

"वह पहले से ट्रेन में था।"

राहुल का दिल तेजी से धड़कने लगा।

 


 

पुराना रेलवे स्टेशन

कुछ देर बाद ट्रेन फिर चलने लगी।

लेकिन इस बार खिड़की के बाहर दिखाई देने वाला नज़ारा बदल चुका था।

राहुल ने बाहर देखा।

एक पुराना रेलवे स्टेशन दिखाई दिया।

स्टेशन की दीवार पर नाम लिखा था—

"शिवपुर जंक्शन"

राहुल ने यह नाम कभी नहीं सुना था।

ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर रुकी।

दरवाज़ा खुला।

बाहर कोई यात्री नहीं था।

सिर्फ़ एक बूढ़ा स्टेशन मास्टर खड़ा था।

उसने राहुल को देखते ही कहा—

"तुम इतने साल बाद वापस आए हो?"

राहुल के हाथ-पैर ठंडे पड़ गए।

"मैं पहली बार यहाँ आया हूँ।"

बूढ़े आदमी ने उसे कुछ सेकंड देखा।

फिर उसने अपनी जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।

तस्वीर में वही ट्रेन खड़ी थी।

और उसके सामने कई यात्री खड़े थे।

राहुल ने तस्वीर को ध्यान से देखा।

उसमें एक चेहरा ऐसा था जिसे देखकर उसकी साँस रुक गई।

वह चेहरा...

राहुल का था।

 


 

तस्वीर में दिख रहा आदमी

राहुल ने काँपती आवाज़ में पूछा—

"यह तस्वीर कब की है?"

बूढ़े स्टेशन मास्टर ने कहा—

"बारह साल पहले की।"

"लेकिन मैं तो उस समय..."

राहुल की बात पूरी होने से पहले ही बूढ़े ने कहा—

"तुम उस ट्रेन में थे।"

राहुल पीछे हट गया।

उसे अचानक अपने बचपन की एक धुंधली याद आने लगी।

बारिश की रात।

रेलवे स्टेशन।

एक तेज़ आवाज़।

और फिर...

कुछ भी याद नहीं।

 


 

असली कहानी

राहुल ने बूढ़े से पूछा—

"उस रात हुआ क्या था?"

बूढ़ा कुछ देर चुप रहा।

फिर उसने बताया कि बारह साल पहले इसी रेलवे लाइन पर एक ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।

कई यात्रियों की मौत हो गई थी।

लेकिन एक बच्चा जीवित मिला था।

उस बच्चे का नाम था—

राहुल।

राहुल की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा।

"लेकिन मैं तो अपने परिवार के साथ शहर में रहता था।"

बूढ़े ने कहा—

"तुम्हें हादसे के बाद सब कुछ भूल गया था। तुम्हारे परिवार ने तुम्हें दूसरे शहर ले जाकर नई जिंदगी शुरू की।"

राहुल कुछ बोल नहीं पाया।

तभी दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई दी।

बूढ़े ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया।

"अब तुम्हें यहाँ से जाना होगा।"

 


 

वह आदमी कौन था?

राहुल ट्रेन में वापस चढ़ गया।

डिब्बे में वही आदमी फिर बैठा था।

वही काला कोट।

वही चेहरा।

राहुल ने इस बार सीधे पूछा—

"तुम कौन हो?"

आदमी मुस्कुराया।

फिर उसने कहा—

"तुम्हें सच याद दिलाने वाला।"

राहुल ने पूछा—

"क्या तुम भी उस हादसे में थे?"

आदमी ने खिड़की की तरफ देखा।

"हाँ।"

"फिर तुम जिंदा कैसे हो?"

आदमी ने धीरे से अपना चेहरा उसकी तरफ घुमाया।

राहुल की साँस रुक गई।

वह चेहरा तस्वीर में मौजूद एक यात्री का था।

उस यात्री की तस्वीर के नीचे लिखा था—

"मृतक।"

 


 

सुबह ट्रेन कहाँ मिली?

अगली सुबह रेलवे कर्मचारियों को पटरी के किनारे राहुल का बैग मिला।

लेकिन राहुल वहाँ नहीं था।

रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार उस रात उस रूट पर कोई ट्रेन नहीं चली थी।

शिवपुर जंक्शन नाम का कोई स्टेशन भी उस रेलवे लाइन पर मौजूद नहीं था।

सबसे अजीब बात यह थी कि राहुल का टिकट उसकी जेब से मिला।

टिकट पर वही पुरानी तारीख थी।

और सीट नंबर के सामने लिखा था—

"309"

जब पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले, तो उन्हें बारह साल पहले हुए ट्रेन हादसे की तस्वीर मिली।

उस तस्वीर में राहुल खड़ा था।

और उसके ठीक पीछे...

वही आदमी खड़ा था।

 


 

आज भी उस इलाके के लोग उस घटना को real horror story in hindi की तरह सुनाते हैं।

कहा जाता है कि साल में एक रात ऐसी आती है जब पुराने रेलवे ट्रैक पर एक ट्रेन दिखाई देती है।

ट्रेन कुछ मिनटों के लिए रुकती है।

फिर बिना किसी यात्री के गायब हो जाती है।

कभी-कभी उस ट्रेन की खिड़की से एक आदमी बाहर देखता हुआ दिखाई देता है।

और उसके सामने वाली सीट पर...

एक लड़का चुपचाप बैठा रहता है।

शायद इसी वजह से ऐसी horror story in hindi सिर्फ़ डराने के लिए नहीं होतीं।

कुछ घटनाएँ सवाल छोड़ जाती हैं।

और शायद unexpected stories का सबसे डरावना हिस्सा यही है कि हर रहस्य का जवाब मिलना ज़रूरी नहीं होता।

कभी-कभी कुछ सफर...

खत्म नहीं होते।

वे बस अगली रात की आखिरी ट्रेन का इंतज़ार करते हैं।

पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected Stories.in

Căutare
Categorii
Citește mai mult
Health
Cenforce 150 Tablets: Strength, Use, and Key Facts
Cenforce 150 Tablets are a prescription medication designed for individuals who need a...
De Daisymiller1561 2026-01-08 16:06:38 0 711
Développement
Website Development Stages: A Complete Step-by-Step Guide
Overview :  A successful website is more than an attractive homepage. It is a carefully...
De sujata 2026-10-02 05:51:35 0 33
Food
A Guide to Better Rolling Experiences with rizla rolling paper in the UK
  rizla rolling paper continues to be recognised by adults across the United Kingdom for its...
De alfakher43 2026-07-13 17:18:58 0 140
Health
Gynaecomastia Surgery in Dubai: Restore Confidence Fast
For many men, chest fullness is more than a physical concern. It can quietly affect posture,...
De tajmeelsclinic 2026-03-26 07:16:14 0 336
Sngine France : Partagez Vos Moments, Faites de Nouveaux Amis https://sngine.fr