The Silent Phone – आधी रात को बजने वाला फोन

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रात के करीब 1 बजे निखिल अपने कमरे में अकेला बैठा था।

अचानक उसके कमरे में रखा पुराना लैंडलाइन फोन बजने लगा।

ट्रिन... ट्रिन...

निखिल उस फोन को कभी इस्तेमाल नहीं करता था।

वह फोन उसके दादा के समय से घर में लगा हुआ था।

उसने रिसीवर उठाया।

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक सिर्फ़ खामोशी थी।

फिर एक धीमी आवाज़ आई—

"निखिल, खिड़की बंद कर दो।"

निखिल ने तुरंत खिड़की की तरफ देखा।

वह पहले से बंद थी।

 


 

दूसरी कॉल

निखिल ने फोन रख दिया।

कुछ मिनट बाद फोन फिर बजा।

इस बार आवाज़ उसके पिता की थी।

"निखिल, ऊपर मत जाना।"

निखिल घबरा गया।

उसके पिता की मृत्यु को पाँच साल हो चुके थे।

उसने फोन पटक दिया।

लेकिन फोन फिर बजने लगा।

 


 

पुरानी रिकॉर्डिंग

निखिल ने अगले दिन अपने चाचा से इस फोन के बारे में पूछा।

चाचा ने बताया कि उसके दादा के समय भी रात में इस फोन पर अजीब कॉल आती थीं।

हर बार कॉल करने वाला घर के अंदर होने वाली किसी घटना के बारे में पहले से बता देता था।

एक बार फोन पर कहा गया था—

"रसोई में आग लगने वाली है।"

कुछ मिनट बाद सच में गैस पाइप लीक हो गई थी।

उसके बाद परिवार ने फोन का इस्तेमाल बंद कर दिया।

 


 

तीसरी रात

निखिल ने तय किया कि वह पता लगाएगा कि कॉल कहाँ से आ रही है।

उसने फोन कंपनी से पुराना कनेक्शन चेक करवाया।

उसे बताया गया कि नंबर पंद्रह साल पहले बंद हो चुका था।

निखिल के हाथ से फोन गिरते-गिरते बचा।

फिर उसी रात फोन बजा।

इस बार आवाज़ उसकी अपनी थी।

"निखिल, दरवाज़ा मत खोलना।"

उसी समय मुख्य दरवाज़े पर दस्तक हुई।

ठक... ठक... ठक...

निखिल बिल्कुल चुप रहा।

कुछ सेकंड बाद दस्तक बंद हो गई।

 


 

दरवाज़े के बाहर

सुबह उसने दरवाज़ा खोला।

बाहर कोई नहीं था।

लेकिन दरवाज़े के नीचे एक पुराना कागज़ पड़ा था।

उस पर उसके दादा की लिखावट थी—

"अगर फोन तुम्हारी आवाज़ में बात करे, तो आखिरी कॉल मत उठाना।"

निखिल को यह बात समझ नहीं आई।

 


 

आखिरी कॉल

रात 1 बजे फोन फिर बजा।

निखिल ने इस बार रिसीवर नहीं उठाया।

फोन लगातार बजता रहा।

फिर अचानक बंद हो गया।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

कुछ सेकंड बाद...

फोन की घंटी फिर बजी।

निखिल ने डरते हुए रिसीवर उठा लिया।

दूसरी तरफ उसकी अपनी आवाज़ थी।

लेकिन आवाज़ रो रही थी।

"तुमने कॉल क्यों उठाई?"

निखिल ने पूछा—

"तुम कौन हो?"

आवाज़ बोली—

"मैं वही हूँ जो तुम्हारे कमरे में खड़ा है।"

निखिल ने धीरे-धीरे पीछे देखा।

कमरा खाली था।

लेकिन आईने में...

उसके पीछे एक आदमी खड़ा था।

 


 

अगली सुबह

सुबह निखिल का कमरा खुला मिला।

वह घर में नहीं था।

फोन मेज पर रखा था।

पुलिस ने फोन की जाँच की।

लाइन वास्तव में बंद थी।

लेकिन कॉल हिस्ट्री में एक आखिरी नंबर मौजूद था।

वह नंबर निखिल का अपना था।

कॉल का समय—

1:00 AM

और अवधि—

00:00:13

तेरह सेकंड।

इस घटना को परिवार के कुछ लोग आज भी real horror story in hindi मानते हैं।

सबसे अजीब बात यह है कि निखिल के गायब होने के बाद भी वह फोन कभी-कभी रात में बजता था।

लेकिन अब कॉल उठाने पर कोई आवाज़ नहीं आती।

सिर्फ़ बहुत धीमी साँसों की आवाज़ सुनाई देती है।

ऐसी horror story in hindi शायद इसलिए ज्यादा डरावनी लगती है क्योंकि इसमें डर किसी सुनसान जगह से नहीं, बल्कि घर में रखी एक सामान्य चीज़ से शुरू होता है।

और ऐसी unexpected stories का अंत हमेशा सवाल छोड़ जाता है—

अगर निखिल फोन पर अपनी ही आवाज़ सुन रहा था...

तो दूसरी तरफ आखिर था कौन?

 पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in

 

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