The Empty School – आधी रात के बाद खुलने वाला स्कूल

0
174

कहते हैं कि स्कूल में बच्चों की हँसी और शिक्षकों की आवाजें गूँजती हैं। लेकिन क्या हो अगर किसी स्कूल में रात के बारह बजे भी घंटी बजे और खाली कक्षाओं में बच्चों के पढ़ने की आवाज सुनाई दे?

यह कहानी है आदित्य की, जिसे एक पुराने स्कूल में चौकीदार की नौकरी मिली थी। उसे नहीं पता था कि इस नौकरी की पहली ही रात उसकी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बनने वाली है।

पुराने स्कूल में पहली रात

आदित्य को शहर से लगभग बीस किलोमीटर दूर एक पुराने स्कूल में चौकीदार की नौकरी मिली थी। स्कूल कई वर्षों से बंद पड़ा था, लेकिन उसकी इमारत की देखभाल के लिए एक व्यक्ति की जरूरत थी।

स्कूल की इमारत बहुत बड़ी थी। उसमें दो मंजिलें, एक पुरानी लाइब्रेरी, विज्ञान प्रयोगशाला और लगभग पंद्रह कक्षाएँ थीं।

नौकरी मिलने के दिन प्रबंधक ने उसे कुछ जरूरी बातें बताईं।

“रात में मुख्य दरवाजा बंद रखना। किसी को अंदर मत आने देना और सबसे जरूरी बात, रात बारह बजे के बाद तीसरी मंजिल की घंटी सुनाई दे तो वहाँ जाने की कोशिश मत करना।”

आदित्य ने हैरानी से पूछा, “लेकिन स्कूल में तो सिर्फ दो मंजिलें हैं।”

प्रबंधक ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ जवाब नहीं दिया।

आदित्य को लगा कि शायद वह उसके साथ मजाक कर रहा है।

पहली रात वह अपना सामान लेकर स्कूल पहुँचा। उसने मुख्य दरवाजा बंद किया और कार्यालय में रखी कुर्सी पर बैठ गया।

रात के लगभग ग्यारह बजे तक सब सामान्य रहा।

फिर अचानक स्कूल की घंटी बज उठी।

टन... टन... टन...

आदित्य ने घड़ी देखी। रात के ठीक बारह बज रहे थे।

खाली कक्षा में कौन पढ़ रहा था?

घंटी की आवाज सुनकर आदित्य अपनी कुर्सी से उठा। उसने टॉर्च ली और गलियारे की तरफ बढ़ा।

पहली कक्षा के पास पहुँचते ही उसे बच्चों के पढ़ने की आवाज सुनाई दी।

“दो और दो बराबर चार...”

आदित्य ने दरवाजा खोला।

कक्षा पूरी तरह खाली थी। मेज-कुर्सियाँ अपनी जगह पर थीं और ब्लैकबोर्ड पर कुछ भी नहीं लिखा था।

उसने दरवाजा बंद किया और आगे बढ़ गया।

दूसरी कक्षा से भी बच्चों के बोलने की आवाज आ रही थी।

इस बार किसी शिक्षक की आवाज सुनाई दी।

“सब बच्चे अपनी किताब खोलो। आज हम उपस्थिति लेंगे।”

आदित्य ने दरवाजे के छोटे शीशे से अंदर देखा।

सभी बेंचों पर बच्चे बैठे थे। उनके सामने किताबें खुली हुई थीं और एक महिला शिक्षिका ब्लैकबोर्ड की तरफ मुँह करके खड़ी थी।

आदित्य ने राहत की साँस ली और दरवाजा खोल दिया।

लेकिन दरवाजा खुलते ही सारी आवाजें बंद हो गईं।

कक्षा खाली थी।

सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर सफेद चॉक से एक नाम लिखा हुआ था।

आदित्य शर्मा।

वह घबराकर पीछे हट गया।

तीसरी मंजिल का दरवाजा

अगली रात आदित्य ने तय किया कि वह किसी भी आवाज पर ध्यान नहीं देगा। उसने कार्यालय का दरवाजा बंद किया और मोबाइल पर गाने सुनने लगा।

लेकिन रात के बारह बजे फिर घंटी बजने लगी।

इस बार आवाज पहले से ज्यादा तेज थी।

टन... टन... टन...

इसके बाद उसे ऊपर से किसी के दौड़ने की आवाज सुनाई दी।

आदित्य ने छत की तरफ देखा। वहाँ कोई रास्ता नहीं था, फिर भी आवाज साफ सुनाई दे रही थी।

तभी उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया।

“कृपया कक्षा 13 में आ जाइए। आपकी उपस्थिति अधूरी है।”

आदित्य के हाथ काँपने लगे।

स्कूल में कक्षा 13 थी ही नहीं।

वह धीरे-धीरे सीढ़ियों की तरफ बढ़ा। पहली मंजिल पार करने के बाद उसे ऊपर जाने वाली एक नई सीढ़ी दिखाई दी।

उसने पहले कभी वहाँ कोई सीढ़ी नहीं देखी थी।

सीढ़ियों के ऊपर एक दरवाजा था, जिस पर लिखा था—

कक्षा नंबर 13।

दरवाजा अपने आप खुल गया।

कक्षा में बैठे बच्चे

अंदर लगभग बीस बच्चे बैठे थे। सभी ने पुराने स्कूल की यूनिफॉर्म पहन रखी थी। उनके चेहरे पीले थे और आँखें लगातार ब्लैकबोर्ड की तरफ देख रही थीं।

आगे एक महिला शिक्षिका खड़ी थी।

उसने आदित्य को देखकर कहा, “आप देर से आए हैं। आज आपकी उपस्थिति लगनी बाकी है।”

आदित्य ने पूछा, “यह कौन-सी जगह है? यहाँ ये बच्चे कौन हैं?”

शिक्षिका ने रजिस्टर खोला।

“यह हमारी आखिरी कक्षा है। यहाँ से कोई बच्चा छुट्टी लेकर घर नहीं जाता।”

तभी पीछे बैठे एक छोटे लड़के ने धीरे से कहा, “सर, आप भी यहाँ फँस जाएँगे।”

आदित्य ने उसकी तरफ देखा।

उस बच्चे की गर्दन पर गहरा निशान था।

शिक्षिका ने तुरंत उसे डाँटा।

“चुप रहो! जब तक घंटी नहीं बजती, कोई अपनी सीट से नहीं उठेगा।”

आदित्य ने दरवाजे की तरफ भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा बंद हो गया।

तभी ब्लैकबोर्ड पर अपने आप एक सवाल लिखा दिखाई दिया।

आज की तारीख क्या है?

आदित्य ने मोबाइल देखा। तारीख 14 नवंबर थी।

उसने जवाब दिया।

शिक्षिका मुस्कुराई और बोली, “गलत जवाब।”

फिर उसने रजिस्टर में एक नाम काट दिया।

स्कूल का पुराना रहस्य

आदित्य ने देखा कि रजिस्टर में सभी बच्चों के नाम के सामने एक ही तारीख लिखी थी—14 नवंबर 1998।

उसे अचानक प्रबंधक की बात याद आई। उसने किसी तरह खिड़की खोलने की कोशिश की, लेकिन बाहर सिर्फ अंधेरा दिखाई दे रहा था।

तभी एक बच्चे ने धीरे से कहा, “सर, उस दिन हमारे स्कूल में आग लगी थी।”

आदित्य ने पूछा, “क्या हुआ था?”

बच्चे ने बताया कि कई साल पहले स्कूल में आग लग गई थी। उस समय बच्चे कक्षा में पढ़ रहे थे। स्कूल का मुख्य दरवाजा बंद था और बहुत से बच्चे बाहर नहीं निकल पाए थे।

उस दुर्घटना के बाद स्कूल हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

लेकिन हर साल 14 नवंबर की रात बारह बजे वही कक्षा फिर से शुरू होती थी।

आदित्य ने डरते हुए पूछा, “और तुम लोग?”

बच्चे ने जवाब दिया, “हम आज भी छुट्टी का इंतजार कर रहे हैं।”

अचानक शिक्षिका ने रजिस्टर बंद किया और आदित्य की तरफ बढ़ने लगी।

“अब आपकी उपस्थिति भी पूरी हो गई है।”

आखिरी घंटी

आदित्य ने पूरी ताकत से दरवाजे को धक्का दिया। इस बार दरवाजा खुल गया।

वह सीढ़ियों से नीचे भागा। पीछे से बच्चों की आवाजें आ रही थीं।

“सर, हमें भी घर जाना है!”

उसने मुख्य दरवाजा खोला और बिना पीछे देखे सड़क की तरफ दौड़ने लगा।

कुछ दूर पहुँचने के बाद उसे स्कूल की घंटी सुनाई दी।

टन... टन... टन...

फिर अचानक सब शांत हो गया।

अगली सुबह प्रबंधक स्कूल पहुँचा तो आदित्य वहाँ नहीं था। कार्यालय की मेज पर उसकी टॉर्च और मोबाइल रखा हुआ था।

मोबाइल की स्क्रीन पर एक तस्वीर खुली थी।

तस्वीर में कक्षा नंबर 13 के सभी बच्चे बैठे थे। सबसे पीछे आदित्य भी स्कूल की यूनिफॉर्म पहनकर बैठा था।

तस्वीर के नीचे एक नया संदेश दिखाई दे रहा था।

“उपस्थिति पूरी हो गई। अब अगली कक्षा का इंतजार कीजिए।”

इसके बाद स्कूल के प्रबंधक ने कभी किसी नए चौकीदार को वहाँ नौकरी पर नहीं रखा।

क्या स्कूल की घंटी आज भी बजती है?

कुछ लोगों का कहना है कि उस पुराने स्कूल के पास से गुजरते समय आधी रात को घंटी की आवाज सुनाई देती है। हालाँकि इस घटना की कोई वास्तविक पुष्टि नहीं है, लेकिन उस इमारत को देखने वाले लोग आज भी वहाँ जाने से बचते हैं।

अगर आपको real horror story in hindi जैसी डरावनी और रहस्यमयी कहानियाँ पसंद हैं, तो यह कहानी आपको एक अलग ही अनुभव दे सकती है। ऐसी ही रोमांचक horror story in hindi में रहस्य, डर और अनजाने सवालों का अनोखा मेल मिलता है।

और भी नई तथा दिलचस्प कहानियाँ पढ़ने के लिए unexpected stories से जुड़े रहें।

आपकी राय: अगर रात के बारह बजे किसी बंद स्कूल से बच्चों के पढ़ने की आवाज आए, तो क्या आप अंदर जाकर देखेंगे?

नोट: यह कहानी काल्पनिक है और मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है।

 

Căutare
Categorii
Citește mai mult
Drinks
The Evolution of India’s Premium Spirits: Quality, Craftsmanship and Consumer Choice
India’s spirits industry is experiencing a transformation as consumers become more...
De Gaurav 2026-10-15 09:49:48 0 317
Information
GhostPro Vapes: Expanding Opportunities in the German Disposable Vape Market
Germany represents one of the most structured and influential vaping markets in Europe, supported...
De ghostprovapes327 2026-01-25 08:40:57 0 1K
Health
Find the Best Spects Shop Near Me: Your Ultimate Guide to Stylish and Affordable Eyewear
When it comes to vision care and style, finding the right spects shop near me is essential....
De mrpd123 2025-12-18 15:56:19 0 1K
Tourisme
https://www.forcontu.com/sites/default/files/webform/quotation/comment_puis-je_parler_a_quelquun_au_qatar_guide_complet_pour_contacter_le_service_client.pdf
https://www.forcontu.com/sites/default/files/webform/quotation/comment_puis-je_parler_a_quelquun_...
De carelike 2026-01-15 16:59:52 0 533
Alte
Taxi Service in Kolkata | Cab Service in Kolkata
Cabbazar offers the best taxi service in Kolkata. Book your Kolkata taxi service online now and...
De cabbazar 2026-04-17 16:54:17 0 344
Sngine France : Partagez Vos Moments, Faites de Nouveaux Amis https://sngine.fr