The Lift That Opened into the Past – वह लिफ्ट जो अतीत में खुलती थी

0
57

करण एक ऊँची इमारत में काम करता था।

वह हर दिन लिफ्ट से बारहवीं मंज़िल पर जाता था।

एक रात ऑफिस से निकलते समय उसने लिफ्ट का बटन दबाया।

दरवाज़े बंद हुए।

डिस्प्ले पर मंज़िलें बदलने लगीं।

बारह...

ग्यारह...

दस...

फिर अचानक डिस्प्ले पर एक ऐसा नंबर आया, जो इमारत में था ही नहीं—

मंज़िल 0।

लिफ्ट रुक गई।

दरवाज़े खुलते ही करण ने एक पुराना ऑफिस देखा।

वही ऑफिस, लेकिन कई साल पहले जैसा।

 


 

पुराना ऑफिस

अंदर लोग पुराने कंप्यूटरों पर काम कर रहे थे।

दीवार पर लगी कैलेंडर की तारीख पंद्रह साल पुरानी थी।

करण ने एक आदमी से पूछा—

"यह कौन-सी मंज़िल है?"

आदमी ने हैरानी से उसे देखा।

"तुम नए हो क्या?"

करण ने कहा—

"मैं यहाँ काम करता हूँ।"

आदमी हँसा।

"यहाँ तो तुम्हारे पिता काम करते थे।"

करण का चेहरा उतर गया।

उसके पिता की मृत्यु तब हुई थी, जब वह बहुत छोटा था।

 


 

पिता की मेज़

करण धीरे-धीरे ऑफिस के अंदर गया।

एक मेज़ पर उसके पिता की तस्वीर रखी थी।

वह बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी तस्वीर उसके घर में थी।

मेज़ की दराज़ में एक चिट्ठी रखी थी।

उस पर लिखा था—

"करण के लिए, जब वह बड़ा हो जाए।"

करण ने चिट्ठी खोली।

उसमें लिखा था—

"बेटा, अगर तुम यह पढ़ रहे हो, तो समझना कि लिफ्ट ने तुम्हें यहाँ पहुँचा दिया है। किसी भी हालत में मेरे पीछे मत आना।"

 


 

दरवाज़े के पीछे

तभी ऑफिस के आखिरी कमरे से उसके पिता की आवाज़ आई—

"करण, इधर आओ।"

करण की आँखों में आँसू आ गए।

वह उस आवाज़ की तरफ बढ़ा।

लेकिन चिट्ठी की आखिरी पंक्ति याद आ गई।

"मेरे पीछे मत आना।"

उसने कदम रोक लिए।

दरवाज़े के पीछे से फिर आवाज़ आई—

"बेटा, मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ।"

करण ने पूछा—

"आप सच में मेरे पापा हैं?"

कुछ पल खामोशी रही।

फिर आवाज़ आई—

"अगर मैं तुम्हारे पापा नहीं हूँ, तो तुम्हारी माँ ने मुझे घर से क्यों निकाला था?"

करण के हाथ से चिट्ठी गिर गई।

यह बात उसके पिता के अलावा कोई नहीं जानता था।

 


 

वापस लौटने का रास्ता

करण लिफ्ट की तरफ भागा।

लेकिन वहाँ लिफ्ट नहीं थी।

सिर्फ़ एक पुराना दरवाज़ा था।

उसने दरवाज़ा खोला।

अंदर वही ऑफिस था।

लेकिन अब सभी लोग उसे घूर रहे थे।

उनकी आँखें बिल्कुल काली थीं।

एक साथ सभी ने कहा—

"तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।"

करण ने आँखें बंद कीं।

अचानक लिफ्ट की घंटी बजी।

वह अपने वर्तमान ऑफिस में खड़ा था।

डिस्प्ले पर बारहवीं मंज़िल चमक रही थी।

 


 

आखिरी मंज़िल

करण घर पहुँचा और अपनी माँ को सब बताया।

माँ ने उसे गले लगा लिया।

फिर उन्होंने बताया कि उसके पिता की मृत्यु से पहले दोनों के बीच बड़ा झगड़ा हुआ था।

लेकिन उन्होंने यह कभी नहीं बताया कि उसके पिता ने जाते समय क्या कहा था।

करण ने पूछा—

"क्या कहा था?"

माँ ने जवाब दिया—

"उन्होंने कहा था कि वह तुम्हें लेने वापस आएँगे।"

उसी रात करण के ऑफिस से फोन आया।

लिफ्ट अपने आप बारहवीं मंज़िल पर खुली थी।

अंदर फर्श पर एक पुरानी चिट्ठी पड़ी थी।

उस पर लिखा था—

"बेटा, अगली बार दरवाज़ा ज़रूर खोलना।"

अगर आप real horror story in hindi जैसी कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं, तो इस लिफ्ट का रहस्य आपको भी हैरान कर सकता है।

क्योंकि कभी-कभी अतीत सिर्फ़ यादों में नहीं रहता...

वह सही मंज़िल का इंतज़ार करता है।

ऐसी horror story in hindi और unexpected stories पढ़ने के लिए विज़िट करें—

पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected Stories.in

 

البحث
الأقسام
إقرأ المزيد
Drinks
India’s Luxury Spirits Industry is Attracting Modern Consumers
India’s premium alcohol market is evolving rapidly as consumers continue moving towards...
بواسطة pikaso 2026-05-20 06:55:12 0 201
أخرى
Certificate of Sponsorship: A Guide for UK Employers and Workers
For UK employers seeking international talent, understanding immigration requirements is...
بواسطة visasimple 2026-10-22 11:39:48 0 78
أخرى
Managed Infrastructure Monitoring Services for US Enterprises: Cloud and On-Prem Solutions
In 2026, the digital infrastructure underpinning the American enterprise is more complex and...
بواسطة rohitsingh121 2026-03-19 12:15:57 0 430
أخرى
Underground Cable Solutions | HBNfpower
Choosing the right Underground cable is essential for power distribution systems that demand...
بواسطة shamshaider 2026-09-25 11:20:37 0 528
Sngine France : Partagez Vos Moments, Faites de Nouveaux Amis https://sngine.fr