The Child in the Hospital Corridor – अस्पताल के गलियारे में खड़ा बच्चा

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डॉ. नीलिमा एक पुराने अस्पताल में रात की ड्यूटी करती थीं।

अस्पताल में एक लंबा गलियारा था, जिसके आखिरी छोर पर कमरा नंबर 17 था।

वह कमरा कई वर्षों से बंद था।

हर रात करीब तीन बजे नीलिमा को वहाँ एक छोटा बच्चा खड़ा दिखाई देता।

वह अस्पताल की सफेद पोशाक पहने रहता।

और हर बार एक ही सवाल पूछता—

"डॉक्टर, मेरी माँ कब आएँगी?"

 


 

खाली गलियारा

पहली बार नीलिमा ने सोचा कि शायद कोई बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया है।

वह उसके पास गईं।

"तुम्हारा नाम क्या है?"

बच्चे ने जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ़ कमरा नंबर 17 की तरफ इशारा किया।

नीलिमा ने पीछे मुड़कर देखा।

जब वह दोबारा पलटीं, बच्चा गायब था।

उन्होंने पूरे अस्पताल में उसे ढूँढ़ा।

लेकिन किसी ने उस बच्चे को नहीं देखा था।

 


 

पुराना रजिस्टर

अगले दिन नीलिमा ने अस्पताल के रिकॉर्ड रूम में पुराने रजिस्टर देखे।

कमरा नंबर 17 के रिकॉर्ड में एक बच्चे का नाम दर्ज था।

आरव शर्मा।

वह कई साल पहले इसी अस्पताल में भर्ती हुआ था।

उसकी माँ रात-दिन उसके साथ रहती थी।

एक रात अचानक अस्पताल में आग लग गई।

आरव को बचा लिया गया, लेकिन उसकी माँ उसी हादसे में लापता हो गई थी।

नीलिमा ने रजिस्टर बंद कर दिया।

उसी समय पीछे से आवाज़ आई—

"डॉक्टर, आपने मेरी माँ को देखा?"

 


 

कमरे के अंदर

उस रात नीलिमा ने कमरा नंबर 17 खोलने का फैसला किया।

दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।

अंदर एक पुराना बिस्तर था।

खिड़की के पास बच्चों के खिलौने रखे थे।

दीवार पर एक छोटी-सी हथेली का निशान बना था।

नीलिमा ने टॉर्च की रोशनी उस पर डाली।

निशान के नीचे लिखा था—

"माँ यहीं आएँगी।"

तभी बिस्तर के नीचे से किसी बच्चे के रोने की आवाज़ आई।

 


 

माँ की आवाज़

नीलिमा ने बिस्तर के नीचे देखा।

वहाँ कोई नहीं था।

लेकिन कमरे के बाहर से एक औरत की आवाज़ आई—

"आरव!"

नीलिमा गलियारे में दौड़ीं।

एक औरत सफेद साड़ी पहने खड़ी थी।

उसकी आँखें कमरे नंबर 17 पर टिकी थीं।

वह अंदर गई और खाली बिस्तर पर बैठकर रोने लगी।

तभी बच्चे की आवाज़ आई—

"माँ, अब मैं ठीक हूँ।"

औरत ने हाथ बढ़ाया।

कुछ सेकंड बाद कमरे में कोई नहीं था।

 


 

आखिरी मरीज

अगली सुबह नीलिमा ने अस्पताल के पुराने रिकॉर्ड में उस औरत की तस्वीर देखी।

वह आरव की माँ थी।

लेकिन तस्वीर के नीचे लिखा था कि वह भी उसी आग के बाद कभी नहीं मिली।

नीलिमा ने अस्पताल के मैनेजर को पूरी घटना बताई।

मैनेजर ने कमरा नंबर 17 की चाबी हमेशा के लिए बंद करने का आदेश दिया।

लेकिन उसी रात अस्पताल के कंप्यूटर पर एक नया मरीज दर्ज हुआ।

नाम था—

डॉ. नीलिमा।

कमरे का नंबर था—

17।

नीलिमा ने स्क्रीन बंद कर दी।

लेकिन गलियारे से एक बच्चे की आवाज़ आई—

"डॉक्टर, अब आपकी माँ कब आएँगी?"

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क्योंकि कुछ इंतज़ार इतने लंबे होते हैं कि लोग उन्हें भूल जाते हैं...

लेकिन कुछ कमरे उन्हें कभी भूलने नहीं देते।

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