The Last Passenger in the Taxi – टैक्सी में बैठा आखिरी मुसाफ़िर
रात के करीब दो बजे समीर अपनी टैक्सी लेकर घर लौट रहा था।
सड़कें बिल्कुल खाली थीं।
तभी एक सुनसान मोड़ पर उसे सफेद कपड़े पहने एक आदमी खड़ा दिखाई दिया।
उस आदमी ने हाथ देकर टैक्सी रोकी।
समीर ने शीशा नीचे किया और पूछा—
"कहाँ जाना है?"
आदमी ने पीछे की सीट पर बैठते हुए कहा—
"जहाँ मैं आखिरी बार घर गया था।"
समीर ने पता पूछा।
आदमी ने एक पुरानी कॉलोनी का नाम बताया।
वह कॉलोनी शहर से बहुत दूर थी।
पीछे की सीट पर खामोशी
समीर ने गाड़ी चला दी।
कुछ मिनट तक टैक्सी में बिल्कुल खामोशी रही।
फिर पीछे बैठे आदमी ने पूछा—
"तुम्हें डर नहीं लगता?"
समीर हँसकर बोला—
"किस बात का?"
आदमी ने धीरे से कहा—
"रात में उन लोगों को घर छोड़ने से, जो पहले ही मर चुके हों।"
समीर ने तुरंत रियरव्यू मिरर में देखा।
आदमी मुस्कुरा रहा था।
समीर ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी।
पुरानी कॉलोनी
करीब आधे घंटे बाद टैक्सी एक पुराने मकान के सामने रुकी।
आदमी ने किराया देने के लिए जेब में हाथ डाला।
लेकिन उसकी जेब से एक पुरानी तस्वीर गिर गई।
समीर ने तस्वीर उठाई।
उसमें वही आदमी एक औरत और छोटे बच्चे के साथ खड़ा था।
तस्वीर के पीछे तारीख लिखी थी—
पंद्रह साल पुरानी।
समीर ने पूछा—
"यह आपका परिवार है?"
आदमी की आँखें नम हो गईं।
"था।"
फिर वह टैक्सी से उतर गया।
घर का बंद दरवाज़ा
आदमी ने दरवाज़ा खटखटाया।
अंदर से एक बूढ़ी औरत निकली।
उसे देखते ही वह रोने लगी।
"तुम इतने साल बाद लौटे हो?"
आदमी ने सिर झुका लिया।
समीर टैक्सी में बैठा सब देख रहा था।
अचानक बूढ़ी औरत ने उसकी तरफ देखा और हाथ से पास बुलाया।
समीर बाहर आया।
औरत ने पूछा—
"बेटा, तुम इन्हें कहाँ से लाए?"
समीर ने सड़क की तरफ इशारा किया।
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
वह आदमी गायब हो चुका था।
किराए की रसीद
समीर घबराकर टैक्सी में लौटा।
पीछे की सीट पर वही पुरानी तस्वीर रखी थी।
उसने तस्वीर पलटी।
पीछे एक नया वाक्य लिखा था—
"मुझे घर पहुँचाने के लिए धन्यवाद।"
उसी समय उसके मोबाइल पर टैक्सी ऐप का नोटिफिकेशन आया।
यात्रा पूरी होने का संदेश था।
यात्री का नाम देखकर समीर के हाथ काँप गए।
वह नाम उसी आदमी का था।
और यात्रा का भुगतान नकद में हुआ दिखाया गया था।
लेकिन समीर ने उससे कोई पैसा नहीं लिया था।
अगली सुबह समीर ने उस मकान के बारे में पता किया।
पता चला कि उस आदमी की मौत पंद्रह साल पहले एक सड़क दुर्घटना में हुई थी।
उसकी माँ आज भी हर रात दरवाज़ा खुला रखकर बेटे का इंतज़ार करती थी।
उस रात के बाद समीर को कई बार उसी मोड़ पर एक आदमी दिखाई दिया।
लेकिन अब वह टैक्सी नहीं रोकता था।
वह बस मुस्कुराकर हाथ हिलाता था।
अगर आपको real horror story in hindi जैसी रहस्यमयी कहानियाँ पसंद हैं, तो इस टैक्सी वाले मुसाफ़िर का सवाल आपको भी सोचने पर मजबूर करेगा।
क्योंकि कभी-कभी आखिरी सफर मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं...
किसी अधूरे इंतज़ार को खत्म करने के लिए होता है।
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