The Last Call from My Mother – माँ का आखिरी फोन

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रोहन शहर में नौकरी करता था।

उसकी माँ गाँव में अकेली रहती थीं।

रोहन रोज़ रात को उनसे फोन पर बात करता था।

एक रात उसकी माँ ने फोन उठाते ही कहा—

"बेटा, आज घर जल्दी आ जाना।"

रोहन ने हँसकर पूछा—

"क्यों माँ?"

माँ ने धीमी आवाज़ में कहा—

"घर में कोई मेरे साथ रहता है।"

रोहन ने समझा कि माँ डर गई होंगी।

उसने अगले दिन गाँव आने का वादा किया।

 


 

रात के दो बजे

रोहन सोने ही वाला था कि फोन बजा।

स्क्रीन पर माँ का नाम था।

उसने कॉल उठाई।

माँ फुसफुसाकर बोलीं—

"बेटा, दरवाज़ा मत खोलना।"

रोहन हैरान रह गया।

उसने कहा—

"माँ, मैं तो शहर में हूँ।"

माँ कुछ देर चुप रहीं।

फिर बोलीं—

"मुझे पता है। वह तुम्हारी आवाज़ में भी बात करता है।"

अचानक कॉल कट गई।

 


 

गाँव का बंद घर

अगली सुबह रोहन गाँव पहुँचा।

घर का दरवाज़ा खुला था।

अंदर सब कुछ अपनी जगह पर था।

माँ की चप्पलें दरवाज़े के पास रखी थीं।

रसोई में चाय का कप था।

लेकिन माँ कहीं नहीं थीं।

रोहन ने पूरे घर में उन्हें ढूँढ़ा।

तभी पुराने कमरे से फोन बजने की आवाज़ आई।

 


 

अलमारी के अंदर

आवाज़ एक बंद अलमारी से आ रही थी।

रोहन ने दरवाज़ा खोला।

अंदर उसकी माँ का पुराना मोबाइल रखा था।

मोबाइल की स्क्रीन पर कई मिस्ड कॉल थीं।

सभी कॉल रोहन के नंबर से आई थीं।

लेकिन उन कॉल का समय देखकर वह काँप उठा।

हर कॉल उस समय की थी, जब वह अपनी माँ से बात कर रहा था।

तभी फोन बजा।

इस बार स्क्रीन पर लिखा था—

"माँ।"

 


 

दूसरी तरफ कौन था?

रोहन ने कॉल उठाई।

दूसरी तरफ से उसकी माँ की आवाज़ आई—

"बेटा, पीछे मत देखना।"

रोहन की साँस अटक गई।

उसने धीरे से पूछा—

"माँ, आप कहाँ हैं?"

आवाज़ बोली—

"जहाँ तुमने मुझे आखिरी बार देखा था।"

रोहन को बचपन की एक घटना याद आई।

कई साल पहले इसी घर में उसकी माँ अचानक गायब हो गई थीं।

परिवार ने उन्हें ढूँढ़ा, लेकिन वह नहीं मिलीं।

बाद में रोहन को बताया गया कि उनकी मृत्यु हो चुकी है।

लेकिन उसे उनकी मौत का कोई सबूत कभी नहीं दिखाया गया था।

 


 

बंद कमरे का सच

रोहन ने घर का सबसे पुराना कमरा खोला।

वहाँ दीवार पर एक तस्वीर टँगी थी।

तस्वीर में उसकी माँ थीं।

उनके पास एक छोटा बच्चा खड़ा था।

वह बच्चा रोहन जैसा दिखता था।

लेकिन तस्वीर के पीछे तारीख लिखी थी—

रोहन के जन्म से दो साल पहले।

तभी पीछे से माँ की आवाज़ आई—

"बेटा, अब तुम्हें याद आ गया?"

रोहन पलटा।

कमरा खाली था।

सिर्फ़ एक पुराना फोन फर्श पर रखा था।

 


 

अगली सुबह रोहन गाँव से चला गया।

उसने माँ का पुराना मोबाइल अपने साथ रख लिया।

शहर पहुँचकर उसने फोन बंद करके दराज़ में रख दिया।

लेकिन रात को फिर फोन बजा।

स्क्रीन पर लिखा था—

"घर पहुँच गए, बेटा?"

रोहन ने कॉल नहीं उठाई।

फिर एक मैसेज आया—

"अगली बार मैं तुम्हारे घर आऊँगी।"

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क्या रोहन की माँ सच में उसे बुला रही थीं?

या कोई उनकी आवाज़ का इस्तेमाल कर रहा था?

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