The Voice from the Water Tank – पानी की टंकी से आती आवाज़
मनीष अपने परिवार के साथ एक पुराने मकान में रहने आया था।
मकान की छत पर पानी की बड़ी टंकी थी।
पहले कुछ दिन सब सामान्य रहा।
फिर एक रात मनीष को छत से किसी के गाने की आवाज़ सुनाई दी।
वह ऊपर गया।
छत पर कोई नहीं था।
लेकिन पानी की टंकी के अंदर से आवाज़ आ रही थी।
एक बच्चा बहुत धीरे-धीरे गा रहा था।
टंकी के अंदर कौन था?
मनीष ने टंकी का ढक्कन उठाया।
अंदर साफ़ पानी था।
कोई बच्चा नहीं था।
उसने ढक्कन बंद कर दिया।
तभी अंदर से तीन बार दस्तक हुई।
ठक...
ठक...
ठक...
फिर आवाज़ आई—
"मुझे बाहर निकालो।"
मनीष घबराकर नीचे भागा।
उसने अपनी पत्नी को बताया।
पत्नी ने कहा कि शायद पाइपों की आवाज़ होगी।
लेकिन मनीष जानता था कि उसने साफ़-साफ़ किसी बच्चे को बोलते सुना था।
पानी में दिखता चेहरा
अगली सुबह मनीष ने टंकी का पानी इस्तेमाल करना बंद कर दिया।
लेकिन नल खोलते ही पानी के साथ एक अजीब आवाज़ आई।
"मनीष..."
उसने तुरंत नल बंद कर दिया।
फिर उसने बाल्टी में भरे पानी में अपना चेहरा देखा।
उसके पीछे एक छोटे बच्चे का चेहरा दिखाई दे रहा था।
मनीष पलटा।
पीछे कोई नहीं था।
जब उसने दोबारा पानी में देखा, तो बच्चे ने मुस्कुराकर कहा—
"आपने मुझे पहचान लिया?"
पुराने मकान का इतिहास
मनीष ने मकान के मालिक से बात की।
मालिक पहले तो कुछ नहीं बोला।
फिर उसने बताया कि कई साल पहले वहाँ एक परिवार रहता था।
उनका छोटा बेटा एक दिन अचानक गायब हो गया था।
बहुत खोजने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला।
परिवार कुछ ही दिनों में मकान छोड़कर चला गया।
मनीष ने पूछा—
"क्या उस बच्चे का नाम पता है?"
मालिक ने जवाब दिया—
"आर्यन।"
उसी रात टंकी के अंदर से फिर आवाज़ आई—
"मेरा नाम याद है ना?"
आधी रात का पानी
मनीष ने टंकी खाली करवाने का फैसला किया।
मज़दूरों ने ढक्कन खोला।
टंकी में पानी बहुत कम था।
लेकिन अंदर से किसी के चलने की आवाज़ आ रही थी।
मज़दूर नीचे उतरने से डर गए।
तभी टंकी के अंदर से एक छोटी हथेली बाहर निकली।
सब पीछे हट गए।
हथेली ने टंकी के किनारे को पकड़ा।
फिर एक बच्चे की आवाज़ आई—
"मुझे घर जाना है।"
अचानक बिजली चली गई।
कुछ सेकंड बाद जब रोशनी लौटी, तो टंकी खाली थी।
आखिरी बूंद
उस रात मनीष ने घर छोड़ने का फैसला कर लिया।
सामान बाँधते समय उसकी बेटी ने पूछा—
"पापा, हम जा क्यों रहे हैं?"
मनीष ने कहा—
"यह घर हमारे रहने के लिए ठीक नहीं है।"
बेटी ने मासूमियत से जवाब दिया—
"लेकिन पापा, वह बच्चा तो हमारे साथ चल रहा है।"
मनीष का चेहरा सफेद पड़ गया।
उसने पूछा—
"कौन-सा बच्चा?"
बेटी ने पानी की बोतल की तरफ इशारा किया।
बोतल के अंदर पानी में एक छोटा चेहरा मुस्कुरा रहा था।
और बोतल के बाहर भाप पर लिखा था—
"अब मैं अकेला नहीं हूँ।"
अगर आप real horror story in hindi पढ़ते हैं, तो पानी की टंकी का यह रहस्य आपको भी हैरान कर सकता है।
क्योंकि कुछ आवाज़ें सिर्फ़ दीवारों के पार नहीं आतीं...
वे उस पानी में भी छिपी हो सकती हैं, जिसे हम रोज़ पीते हैं।
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