The Last Show – आखिरी शो का टिकट
शहर का नटराज सिनेमा पिछले आठ साल से बंद पड़ा था।
काँच टूट चुके थे, पोस्टर फट चुके थे और टिकट खिड़की पर जंग लग चुकी थी।
फिर भी हर शुक्रवार रात 11 बजे वहाँ एक फिल्म चलती थी।
कम से कम रवि ने ऐसा सुना था।
उसे यह बात अफवाह लगी।
एक शुक्रवार वह कैमरा लेकर सिनेमा के बाहर पहुँच गया।
रात के 11 बज चुके थे।
अचानक अंदर से फिल्म चलने की आवाज़ आई।
रवि ने टूटा हुआ दरवाज़ा धकेला और अंदर चला गया।
पूरा हॉल अंधेरे में था।
सिर्फ़ स्क्रीन जल रही थी।
स्क्रीन पर एक पुरानी फिल्म चल रही थी।
रवि ने ध्यान से देखा।
फिल्म में वही सिनेमा हॉल दिखाई दे रहा था।
कैमरा धीरे-धीरे सीटों के बीच से गुजर रहा था।
फिर स्क्रीन पर एक सीट दिखाई दी—
G-13
उस सीट पर एक आदमी बैठा था।
रवि ने कैमरा ज़ूम किया।
उस आदमी का चेहरा देखकर उसके हाथ काँप गए।
वह...
रवि खुद था।
रवि ने तुरंत पीछे देखा।
G-13 सीट खाली थी।
स्क्रीन पर फिल्म आगे बढ़ी।
अब उसमें रवि खड़ा हो रहा था।
वह स्क्रीन के अंदर वाले सिनेमा हॉल में घूम रहा था।
फिर वह कैमरे की तरफ देखकर बोला—
"अगर तुम यह देख रहे हो, तो मेरे पास ज्यादा समय नहीं है।"
रवि पीछे हट गया।
स्क्रीन पर मौजूद रवि ने आगे कहा—
"फिल्म खत्म होने से पहले हॉल से बाहर मत जाना।"
रवि ने फुसफुसाकर कहा—
"क्यों?"
स्क्रीन पर मौजूद रवि मुस्कुराया।
"क्योंकि बाहर वही इंतज़ार कर रहा है।"
अचानक हॉल का मुख्य दरवाज़ा बंद हो गया।
सारी सीटें अपने आप नीचे झुक गईं।
फिल्म चलती रही।
स्क्रीन पर अब सिर्फ़ एक खाली गलियारा था।
उस गलियारे के आखिर में कोई खड़ा था।
रवि ने ध्यान से देखा।
वह आदमी धीरे-धीरे कैमरे की तरफ बढ़ रहा था।
चेहरा साफ़ होने लगा।
रवि का दिल बैठ गया।
वह चेहरा...
उसके पिता का था।
उनकी मृत्यु दस साल पहले हो चुकी थी।
स्क्रीन पर पिता ने कहा—
"बेटा, फिल्म खत्म हो गई।"
उसी क्षण प्रोजेक्टर बंद हो गया।
हॉल में अंधेरा छा गया।
रवि ने मोबाइल की टॉर्च जलाई।
सामने G-13 सीट पर कोई बैठा था।
उसने टॉर्च उसकी तरफ की।
वह आदमी धीरे से खड़ा हुआ।
चेहरा रवि का था।
लेकिन इस बार...
वह मुस्कुरा रहा था।
उसने कहा—
"अब मेरी बारी है बाहर जाने की।"
रवि चीख पड़ा।
लाइट बंद हुई।
और जब दोबारा जली...
हॉल खाली था।
अगली सुबह कुछ लोग सिनेमा के बाहर एक कैमरा पड़ा हुआ देखते हैं।
कैमरे में सिर्फ़ एक आखिरी वीडियो था।
वीडियो में रवि सिनेमा के अंदर जाते हुए दिखाई देता है।
लेकिन वह कभी बाहर नहीं आता।
वीडियो के आखिरी फ्रेम में G-13 सीट दिखाई देती है।
वहाँ रवि बैठा है।
और उसके बगल वाली सीट पर...
उसके पिता बैठे हैं।
नटराज सिनेमा आज भी बंद है।
लेकिन हर शुक्रवार रात 11 बजे वहाँ से फिल्म चलने की आवाज़ सुनाई देने का दावा किया जाता है।
कुछ लोग इसे real horror story in hindi कहते हैं, जबकि कुछ इसे पुरानी इमारत की आवाज़ मानते हैं।
लेकिन पुराने चौकीदार के मुताबिक स्क्रीन पर हर शुक्रवार वही फिल्म चलती है।
बस एक चीज़ बदलती रहती है—
G-13 सीट पर बैठा आदमी।
ऐसी horror story in hindi का डर पर्दे पर दिखाई देने वाली चीज़ से नहीं, बल्कि इस सोच से आता है कि शायद कोई फिल्म सिर्फ़ कहानी नहीं दिखा रही...
वह किसी की अगली जिंदगी रिकॉर्ड कर रही है।
और ऐसी unexpected stories के अंत में एक सवाल हमेशा बचता है—
अगर रवि स्क्रीन के अंदर चला गया, तो उसकी जगह सिनेमा से बाहर कौन निकला?
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