The Book That Remembered Me – वह किताब जो मुझे जानती थी

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शहर की पुरानी लाइब्रेरी में आदित्य को एक ऐसी किताब मिली, जिस पर कोई नाम नहीं लिखा था।

किताब बाकी किताबों से अलग थी।

उसका कवर बिल्कुल काला था और उस पर सिर्फ़ एक छोटा-सा नंबर लिखा था—

27

आदित्य ने किताब खोली।

पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक वाक्य था—

"आदित्य ने यह किताब रात 11:46 बजे खोली।"

वह चौंक गया।

घड़ी में सचमुच 11:46 बज रहे थे।

उसने अगला पन्ना पलटा।

वहाँ लिखा था—

"अब वह पीछे देखेगा।"

आदित्य ने तुरंत पीछे देखा।

लाइब्रेरी खाली थी।

 


 

उसने किताब बंद कर दी।

कुछ सेकंड बाद फिर खोली।

नया वाक्य लिखा था—

"वह डर गया है।"

आदित्य ने किताब लाइब्रेरियन को दिखानी चाही।

लेकिन जब वह काउंटर तक पहुँचा, वहाँ कोई नहीं था।

पूरी लाइब्रेरी अचानक खाली हो चुकी थी।

उसने बाहर जाने की कोशिश की।

मुख्य दरवाज़ा बंद था।

तभी किताब अपने आप खुल गई।

एक नया पन्ना सामने था।

"दरवाज़ा सुबह 6:00 बजे खुलेगा।"

आदित्य ने घड़ी देखी।

11:52 PM.

उसके पास सात घंटे थे।

 


 

उसने आखिरी पन्ना पलटा।

वहाँ उसकी पूरी जिंदगी लिखी हुई थी।

स्कूल।

कॉलेज।

पहली नौकरी।

उसका पहला प्यार।

हर घटना बिल्कुल सही थी।

फिर उसे एक पन्ना मिला जिसे देखकर उसका दिल तेज़ धड़कने लगा।

उस पर लिखा था—

"11:58 PM — आदित्य लाइब्रेरी छोड़ने की कोशिश करेगा।"

वह कुछ नहीं बोला।

ठीक 11:58 पर उसने दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ाया।

दरवाज़ा बंद था।

किताब में लिखा अगला वाक्य सामने आया—

"उसे अब समझ आ गया है कि वह यहाँ पहली बार नहीं आया।"

आदित्य वहीं रुक गया।

उसे अचानक एक पुरानी याद आई।

बचपन में वह इसी लाइब्रेरी में आया था।

उसके साथ उसका बड़ा भाई भी था।

लेकिन उस दिन...

उसका भाई गायब हो गया था।

 


 

आदित्य ने काँपते हाथों से किताब का अगला पन्ना पलटा।

वहाँ उसके भाई का नाम लिखा था।

नीचे सिर्फ़ एक लाइन थी—

"वह अभी भी यहीं है।"

लाइब्रेरी के अंदर किसी बच्चे के दौड़ने की आवाज़ आई।

आदित्य ने आवाज़ का पीछा किया।

एक कोने में उसका भाई खड़ा था।

बिल्कुल वैसा ही...

जैसा वह दस साल की उम्र में था।

उसने मुस्कुराकर कहा—

"तुम मुझे लेने वापस आए हो?"

आदित्य की आँखों में आँसू आ गए।

उसने उसे पकड़ना चाहा।

लेकिन बच्चा पीछे हट गया।

"मत छूना।"

"क्यों?"

बच्चे ने किताब की तरफ इशारा किया।

"क्योंकि किताब में अगला पन्ना तुम्हारे बारे में है।"

 


 

आदित्य ने किताब उठाई।

आखिरी पन्ने पर सिर्फ़ एक वाक्य था—

"सुबह 6 बजे लाइब्रेरी से एक व्यक्ति बाहर जाएगा।"

नीचे दो नाम लिखे थे।

आदित्य

और

उसका भाई।

सुबह लाइब्रेरी खुली।

लाइब्रेरियन ने अंदर जाकर देखा कि मेज पर एक काली किताब पड़ी थी।

आदित्य वहाँ नहीं था।

किताब के आखिरी पन्ने पर अब एक नई लाइन लिखी थी—

"अगला पाठक 11:46 PM पर आएगा।"

इस घटना को कुछ लोग real horror story in hindi मानते हैं, जबकि लाइब्रेरी प्रशासन ऐसी किसी घटना से इनकार करता है।

लेकिन पुरानी लाइब्रेरी में काम करने वाले एक कर्मचारी का कहना है कि नंबर 27 वाली किताब आज भी किसी शेल्फ पर मौजूद है।

ऐसी horror story in hindi में डर इस बात का नहीं कि किताब भविष्य जानती है।

डर यह है कि शायद वह भविष्य लिखती नहीं...

बनाती है।

और ऐसी unexpected stories में सबसे खतरनाक चीज़ कभी-कभी कोई भूत नहीं होता।

वह सिर्फ़...

एक खाली पन्ना होता है।

 पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in

 

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