The Silent Call – फोन के दूसरी तरफ कौन था?
रात के 2:17 बजे विक्रम का फोन बजा।
स्क्रीन पर नंबर देखकर वह चौंक गया।
कॉल उसके अपने नंबर से आ रही थी।
उसने पहले कॉल काट दी।
कुछ सेकंड बाद फोन फिर बजा।
वही नंबर।
विक्रम ने इस बार कॉल उठा ली।
दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक सिर्फ़ साँसों की आवाज़ आती रही।
फिर किसी ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—
"विक्रम, अभी कमरे से बाहर मत निकलना।"
विक्रम ने पूछा—
"कौन बोल रहा है?"
आवाज़ ने जवाब दिया—
"मैं तुम हूँ।"
कॉल कट गई।
विक्रम कुछ देर तक फोन को देखता रहा।
उसने खुद को समझाया कि शायद किसी ने नंबर spoof किया है।
फिर अचानक उसके कमरे के बाहर कुछ गिरने की आवाज़ आई।
धड़ाम!
विक्रम दरवाज़े के पास गया।
बाहर बिल्कुल सन्नाटा था।
तभी फोन फिर बजा।
उसने उठाया।
"क्या हुआ?"
दूसरी तरफ उसकी अपनी आवाज़ थी—
"मैंने कहा था बाहर मत जाना।"
विक्रम ने पूछा—
"तुम मुझे कैसे कॉल कर रहे हो?"
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर आवाज़ आई—
"क्योंकि मैं दस मिनट आगे हूँ।"
विक्रम के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
उसने पूछा—
"दस मिनट बाद क्या होगा?"
आवाज़ बोली—
"तुम दरवाज़ा खोलोगे।"
"नहीं खोलूँगा।"
"तुम खोलोगे।"
कॉल कट गई।
विक्रम ने फोन मेज पर रख दिया।
ठीक दस मिनट बाद...
दरवाज़े पर दस्तक हुई।
ठक... ठक...
विक्रम पीछे हट गया।
बाहर से उसकी माँ की आवाज़ आई—
"बेटा, दरवाज़ा खोलो।"
विक्रम की माँ उस समय गाँव में थी।
वह डर गया।
फोन फिर बजा।
इस बार उसने तुरंत कॉल उठाई।
दूसरी तरफ वही आवाज़ थी।
लेकिन अब वह बहुत घबराई हुई थी।
"विक्रम, दरवाज़ा मत खोलना। मैं गलती कर चुका हूँ।"
विक्रम ने पूछा—
"कौन-सी गलती?"
आवाज़ आई—
"मैंने अभी-अभी दरवाज़ा खोल दिया है।"
विक्रम की नजर दरवाज़े पर गई।
कुंडी धीरे-धीरे घूम रही थी।
वह पीछे हट गया।
दरवाज़ा खुला।
बाहर कोई नहीं था।
सिर्फ़ फर्श पर उसका फोन पड़ा था।
विक्रम ने अपना फोन हाथ में देखा।
उसमें कॉल अभी भी चल रही थी।
फिर फर्श पर पड़े दूसरे फोन से आवाज़ आई—
"अब तुम समझे?"
विक्रम ने धीरे से अपने हाथ में पकड़े फोन की स्क्रीन देखी।
कॉल पर समय लिखा था—
00:10:42
लेकिन कमरे की घड़ी में सिर्फ़...
00:00:03
सुबह पड़ोसियों ने विक्रम का दरवाज़ा खुला पाया।
कमरे में उसका फोन मेज पर रखा था।
कोई विक्रम नहीं था।
फोन की कॉल हिस्ट्री में आखिरी कॉल उसके अपने नंबर पर थी।
समय—
2:17 AM
और कॉल की अवधि—
10 मिनट 42 सेकंड।
विक्रम का पता आज तक नहीं चला।
कुछ लोग इस घटना को एक real horror story in hindi मानते हैं, लेकिन इसका कोई पक्का प्रमाण नहीं है।
फिर भी उसके पुराने नंबर पर कभी-कभी रात 2:17 बजे कॉल आती है।
कॉल उठाने पर कोई बात नहीं करता।
बस कुछ सेकंड बाद एक धीमी आवाज़ सुनाई देती है—
"दरवाज़ा मत खोलना।"
ऐसी horror story in hindi में सबसे डरावनी चीज़ कोई भूत नहीं, बल्कि यह सवाल है कि अगर कॉल करने वाला सच में भविष्य का विक्रम था...
तो फोन उठाने वाला विक्रम आखिर कहाँ चला गया?
और शायद यही वजह है कि ऐसी unexpected stories का अंत पढ़ने के बाद भी दिमाग में एक ही बात घूमती रहती है—
अगर आपका फोन अचानक आपके ही नंबर से बजे... तो क्या आप कॉल उठाएँगे?
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