The Voice in the Attic – छत पर सुनाई देने वाली आवाज़

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रवि ने नया घर किराए पर लिया था।

घर सस्ता था, बड़ा था और शहर से थोड़ा बाहर था। मकान मालिक ने बस एक बात कही थी—

"ऊपर वाली छत का दरवाज़ा रात में मत खोलना।"

रवि ने कारण पूछा तो मकान मालिक मुस्कुराकर बोला,

"पुराना घर है, हवा से आवाज़ें आती हैं।"

रवि ने बात भूल गई।

पहली रात सब सामान्य रहा।

दूसरी रात करीब 2 बजे उसे ऊपर से किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।

ठक... ठक... ठक...

रवि ने सोचा शायद बिल्ली होगी।

फिर आवाज़ आई—

"रवि..."

वह बिस्तर पर बैठ गया।

आवाज़ दोबारा आई।

"रवि... दरवाज़ा खोलो।"

यह आवाज़ उसकी माँ की थी।

लेकिन उसकी माँ उस समय दूसरे शहर में थी।

 


 

रवि ने फोन मिलाया।

माँ ने फोन उठाया।

"हाँ बेटा?"

रवि ने पूछा—

"माँ, आप अभी कहाँ हो?"

"घर पर।"

रवि ने राहत की साँस ली।

तभी ऊपर से फिर वही आवाज़ आई—

"रवि, फोन मत काटना।"

रवि के हाथ से मोबाइल लगभग गिर गया।

उसने माँ से पूछा—

"आपने आवाज़ सुनी?"

माँ कुछ सेकंड चुप रही।

फिर बोली—

"बेटा... ऊपर मत जाना।"

कॉल कट गई।

 


 

अगली सुबह रवि ने मकान मालिक से पूछा कि घर की छत पर पहले कौन रहता था।

मकान मालिक ने जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ़ एक पुरानी चाबी रवि के हाथ में रख दी।

"अगर सच जानना है तो खुद देख लो।"

रवि दोपहर में छत पर गया।

वहाँ एक छोटा कमरा था।

दरवाज़े पर ताला लगा था।

उसने चाबी लगाई।

दरवाज़ा खुल गया।

कमरे के अंदर सिर्फ़ एक पुरानी टेप रिकॉर्डर मशीन थी।

रवि ने उसे चालू किया।

पहले कुछ सेकंड शोर आया।

फिर एक बच्चे की आवाज़ सुनाई दी—

"माँ, मुझे नीचे जाने दो।"

इसके बाद किसी औरत की आवाज़ आई—

"दरवाज़ा मत खोलना।"

फिर जोर से दरवाज़ा पीटने की आवाज़।

और अचानक रिकॉर्डिंग बंद हो गई।

रवि ने टेप निकाल ली।

उसके पीछे तारीख़ लिखी थी—

12 अगस्त 1998

 


 

उस रात रवि ने घर छोड़ने का फैसला किया।

लेकिन सामान पैक करते समय उसे ऊपर से फिर आवाज़ आई।

इस बार आवाज़ उसकी अपनी थी।

"रवि... मुझे नीचे जाने दो।"

वह सीढ़ियों के पास जाकर रुक गया।

ऊपर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

फिर किसी ने धीरे से सीढ़ियों पर कदम रखा।

एक...

दो...

तीन...

रवि पीछे हटने लगा।

अंधेरे में कोई नीचे आ रहा था।

वह भागकर घर से बाहर निकल गया।

 


 

सुबह मकान मालिक के साथ वापस आया।

छत का कमरा खुला था।

अंदर टेप रिकॉर्डर गायब था।

लेकिन दीवार पर नाखून से एक नाम लिखा था—

रवि

मकान मालिक ने नाम देखते ही सिर झुका लिया।

उसने कहा—

"अब यह घर तुम्हारा नहीं रहा।"

रवि ने पूछा—

"मतलब?"

मकान मालिक ने जवाब दिया—

"जिसका नाम उस कमरे की दीवार पर लिखा जाता है, वह कुछ दिनों बाद गायब हो जाता है।"

रवि ने उसी दिन घर खाली कर दिया।

उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लेकिन एक महीने बाद उसे अपने पुराने घर से एक पार्सल मिला।

अंदर वही टेप रिकॉर्डर था।

और उसमें एक नई रिकॉर्डिंग थी।

रिकॉर्डिंग में रवि की अपनी आवाज़ थी—

"माँ, मुझे नीचे जाने दो।"

इस घटना को कुछ लोग real horror story in hindi मानते हैं, जबकि कुछ इसे महज़ एक डरावनी कहानी कहते हैं।

लेकिन रवि के अनुसार सबसे डरावनी बात यह थी कि उसने वह वाक्य कभी बोला ही नहीं था।

ऐसी horror story in hindi में असली डर तब पैदा होता है जब अतीत किसी रिकॉर्डिंग की तरह खत्म नहीं होता, बल्कि वर्तमान में अपनी जगह बना लेता है।

और ऐसी unexpected stories का सवाल हमेशा खुला रह जाता है—

अगर रिकॉर्डिंग में आवाज़ रवि की थी, तो वह टेप आखिर रिकॉर्ड किसने किया?

 पूरी कहानी पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ:
Unexpected stories.in

 

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