The Locked Classroom – बंद स्कूल का आखिरी कमरा
शहर से थोड़ा दूर एक पुराना स्कूल था, जो करीब दस साल पहले बंद हो चुका था।
लोग कहते थे कि स्कूल की दूसरी मंज़िल पर एक कमरा हमेशा बंद रहता है।
अंश को इस बात पर विश्वास नहीं था।
एक शाम वह अपने दोस्तों के साथ स्कूल के अंदर चला गया।
सीढ़ियाँ चढ़ते समय उसे दीवार पर बच्चों के पुराने नाम लिखे दिखाई दिए।
सबसे आखिरी नाम देखकर वह रुक गया—
"अंश शर्मा – कक्षा 8"
अंश का चेहरा सफेद पड़ गया।
उसने इस स्कूल में कभी पढ़ाई नहीं की थी।
उसने दोस्तों को आवाज़ दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
पूरा स्कूल अचानक शांत हो चुका था।
दूसरी मंज़िल पर एक दरवाज़ा दिखाई दिया।
उस पर लिखा था—
कक्षा 8-B
दरवाज़ा खुला हुआ था।
अंदर सभी डेस्क पर धूल जमी थी।
लेकिन आखिरी बेंच पर एक कॉपी बिल्कुल नई थी।
अंश ने कॉपी खोली।
पहले पन्ने पर लिखा था—
"आज अंश स्कूल आएगा।"
अगले पन्ने पर—
"आज अंश कमरे से बाहर नहीं जाएगा।"
अंश ने कॉपी तुरंत बंद कर दी।
तभी ब्लैकबोर्ड पर अपने आप चॉक चलने लगी।
धीरे-धीरे एक वाक्य लिखा गया—
"तुम देर से आए।"
अंश पीछे हट गया।
दरवाज़ा बंद हो चुका था।
उसने जोर से दरवाज़ा खींचा।
कुछ नहीं हुआ।
फिर पीछे से बच्चों के हँसने की आवाज़ आने लगी।
जब अंश ने पलटकर देखा...
सभी डेस्क पर बच्चे बैठे थे।
सभी उसकी तरफ देख रहे थे।
उनके चेहरे धुंधले थे।
सिर्फ़ आखिरी बेंच पर बैठा एक बच्चा साफ़ दिखाई दे रहा था।
वह अंश जैसा ही दिखता था।
उस बच्चे ने कहा—
"तुम्हारी सीट खाली थी।"
अंश चिल्लाया—
"मैं यहाँ कभी नहीं पढ़ा!"
बच्चा मुस्कुराया।
"तुम नहीं... लेकिन तुम्हारा दूसरा हिस्सा पढ़ता था।"
अचानक कमरे की सारी लाइटें बंद हो गईं।
जब लाइट वापस आई...
कमरा खाली था।
दरवाज़ा खुला हुआ था।
अंश बाहर भागा।
अगली सुबह स्कूल के चौकीदार ने पुलिस को बताया कि रात में स्कूल के अंदर किसी बच्चे के चलने की आवाज़ें आई थीं।
CCTV की पुरानी रिकॉर्डिंग में अंश स्कूल में प्रवेश करता दिखाई दिया।
लेकिन बाहर निकलते हुए...
सिर्फ़ उसके कपड़े दिखाई दे रहे थे।
अंश खुद कभी नहीं मिला।
उस स्कूल की घटना को कुछ लोग real horror story in hindi मानते हैं।
आज भी स्कूल की दूसरी मंज़िल का कमरा बंद है।
कहते हैं, कभी-कभी वहाँ से बच्चों की आवाज़ आती है—
"अंश की सीट खाली है।"
ऐसी horror story in hindi का डर इसी बात में छिपा है कि कुछ जगहें सिर्फ़ पुरानी नहीं होतीं—वे अपने अंदर हुई घटनाओं को जैसे संभालकर रखती हैं।
और ऐसी unexpected stories में सबसे बड़ा सवाल यही रह जाता है—
अगर अंश उस स्कूल में कभी पढ़ा ही नहीं था, तो उसकी सीट वहाँ पहले से किसने बचाकर रखी थी?
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