The Forgotten Well – गाँव के पुराने कुएँ की आखिरी आवाज़
गाँव के बाहर एक बहुत पुराना कुआँ था।
उस कुएँ को लोग काला कुआँ कहते थे।
कहा जाता था कि कई साल पहले वहाँ एक आदमी अचानक गायब हो गया था।
उसके बाद गाँव वालों ने कुएँ को लोहे की जाली से बंद कर दिया।
लेकिन हर अमावस्या की रात कुएँ के अंदर से किसी के चिल्लाने की आवाज़ आती थी।
करण की शर्त
करण शहर से अपने गाँव आया था।
उसे इन बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था।
एक रात दोस्तों के साथ बैठे हुए उसने मज़ाक में कहा—
"अगर कोई आवाज़ आती है तो मैं जाकर देखता हूँ।"
दोस्तों ने उसे रोकने की कोशिश की।
लेकिन करण रात करीब 12 बजे टॉर्च लेकर कुएँ के पास पहुँच गया।
पहली आवाज़
कुआँ पूरी तरह शांत था।
करण ने जाली के पास जाकर नीचे टॉर्च की रोशनी डाली।
नीचे सिर्फ़ काला पानी दिखाई दे रहा था।
अचानक आवाज़ आई—
"करण..."
उसने टॉर्च नीचे की।
कोई नहीं था।
फिर आवाज़ आई—
"मुझे बाहर निकालो।"
करण पीछे हट गया।
आवाज़ बिल्कुल कुएँ के अंदर से आ रही थी।
पुरानी बाल्टी
कुएँ के पास एक पुरानी लोहे की बाल्टी पड़ी थी।
करण ने उसे रस्सी से बाँधा और नीचे उतार दिया।
कुछ सेकंड बाद रस्सी अचानक भारी हो गई।
उसे लगा शायद बाल्टी पानी में भर गई है।
उसने रस्सी खींची।
बाल्टी ऊपर आई।
उसमें पानी नहीं था।
उसमें एक पुरानी घड़ी थी।
करण ने घड़ी उठाई।
उस पर समय रुका हुआ था—
12:17
आवाज़ फिर आई
करण ने घड़ी को देखा ही था कि कुएँ से आवाज़ आई—
"तुमने मेरी घड़ी क्यों निकाली?"
करण के हाथ से घड़ी गिर गई।
उसने पीछे मुड़कर देखा।
कोई नहीं था।
फिर कुएँ के अंदर से किसी आदमी के हँसने की आवाज़ आई।
करण दौड़कर गाँव की तरफ भागा।
अगले दिन
करण ने गाँव के बुज़ुर्ग से घड़ी के बारे में पूछा।
बुज़ुर्ग ने घड़ी देखते ही उसे पहचान लिया।
उन्होंने बताया कि करीब बीस साल पहले गाँव का एक आदमी रात 12:17 बजे उसी कुएँ में गिरकर मर गया था।
उसकी घड़ी कभी नहीं मिली।
करण ने पूछा—
"लेकिन फिर यह घड़ी वहाँ कैसे पहुँची?"
बुज़ुर्ग ने कोई जवाब नहीं दिया।
आखिरी कोशिश
करण को यकीन था कि कुएँ में कोई पुरानी चीज़ छिपी है।
अगली रात वह दोबारा वहाँ गया।
इस बार उसने कैमरा भी साथ लिया।
उसने कुएँ की तस्वीर खींची।
फोटो देखते ही उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
तस्वीर में कुएँ के अंदर एक आदमी खड़ा था।
वह ऊपर देख रहा था।
और उसके हाथ में...
वही घड़ी थी।
आखिरी आवाज़
करण ने फोटो ज़ूम की।
आदमी का चेहरा साफ़ दिखाई देने लगा।
वह आदमी...
करण जैसा दिख रहा था।
उसी समय कुएँ से आवाज़ आई—
"अब मेरी बारी खत्म हुई।"
करण पीछे हट गया।
फिर आवाज़ आई—
"अब तुम्हारी शुरू होती है।"
टॉर्च बंद हो गई।
सुबह
सुबह गाँव वालों को कुएँ के पास करण की टॉर्च और मोबाइल मिला।
करण वहाँ नहीं था।
मोबाइल की आखिरी तस्वीर वही थी जिसमें कुएँ के अंदर आदमी खड़ा था।
लेकिन अब तस्वीर में एक बदलाव था।
पहले कुएँ के अंदर एक आदमी था।
अब वहाँ...
दो आदमी खड़े थे।
कई ग्रामीण आज भी इस घटना को एक real horror story in hindi मानते हैं और अमावस्या की रात उस कुएँ के पास जाने से बचते हैं।
कुएँ को बाद में पूरी तरह बंद कर दिया गया।
फिर भी कभी-कभी रात में उसके आसपास से आवाज़ सुनाई देती है—
"मुझे बाहर निकालो..."
ऐसी horror story in hindi में डर सिर्फ़ किसी अदृश्य चीज़ का नहीं होता, बल्कि उस सवाल का भी होता है जिसका जवाब कभी नहीं मिलता।
और गाँव के लोग इसे उन पुरानी unexpected stories में गिनते हैं जिनके बारे में आज भी रात में धीरे आवाज़ में बात की जाती है।
क्योंकि कहते हैं...
कुएँ में झाँकने वाला हमेशा यह नहीं देखता कि नीचे क्या है।
कभी-कभी...
नीचे से भी कोई उसे देख रहा होता है।
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