अभिषेक अपने दादाजी का पुराना घर साफ़ कर रहा था।
घर में बहुत-सी पुरानी किताबें और तस्वीरें थीं।
अलमारी के पीछे उसे एक पीला लिफाफा मिला।
उस पर उसके दादाजी का नाम लिखा था।
लिफाफे पर डाक की मुहर लगी थी।
लेकिन तारीख देखकर अभिषेक हैरान रह गया।
यह खत पचास साल पहले भेजा गया था।
उसने लिफाफा खोला।
अंदर सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—
"मैं आज रात घर लौट रही हूँ। दरवाज़ा खुला रखना।"
दादाजी...