The Child in the Hospital Corridor – अस्पताल के गलियारे में खड़ा बच्चा
डॉ. नीलिमा एक पुराने अस्पताल में रात की ड्यूटी करती थीं।
अस्पताल में एक लंबा गलियारा था, जिसके आखिरी छोर पर कमरा नंबर 17 था।
वह कमरा कई वर्षों से बंद था।
हर रात करीब तीन बजे नीलिमा को वहाँ एक छोटा बच्चा खड़ा दिखाई देता।
वह अस्पताल की सफेद पोशाक पहने रहता।
और हर बार एक ही सवाल पूछता—
"डॉक्टर, मेरी माँ कब आएँगी?"
खाली गलियारा
पहली बार नीलिमा ने सोचा कि शायद कोई बच्चा अपने परिवार से बिछड़ गया है।
वह उसके पास गईं।
"तुम्हारा नाम क्या है?"
बच्चे ने जवाब नहीं दिया।
उसने सिर्फ़...
Virasat: Redefining Heritage and Innovation in India’s Premium Spirits Market
India’s premium spirits industry is changing as consumers become more interested in product quality, distinctive flavours and authentic brand identities. Whisky and vodka brands are responding to these evolving preferences through innovation, refined presentation and a greater emphasis on craftsmanship.
In this competitive environment, Virasat can draw on the idea of heritage to create a distinctive brand narrative. By connecting tradition with contemporary expectations, a brand can...
The Last Passenger in the Taxi – टैक्सी में बैठा आखिरी मुसाफ़िर
रात के करीब दो बजे समीर अपनी टैक्सी लेकर घर लौट रहा था।
सड़कें बिल्कुल खाली थीं।
तभी एक सुनसान मोड़ पर उसे सफेद कपड़े पहने एक आदमी खड़ा दिखाई दिया।
उस आदमी ने हाथ देकर टैक्सी रोकी।
समीर ने शीशा नीचे किया और पूछा—
"कहाँ जाना है?"
आदमी ने पीछे की सीट पर बैठते हुए कहा—
"जहाँ मैं आखिरी बार घर गया था।"
समीर ने पता पूछा।
आदमी ने एक पुरानी कॉलोनी का नाम बताया।
वह कॉलोनी शहर से बहुत दूर थी।
पीछे की सीट पर खामोशी
समीर ने गाड़ी चला दी।
कुछ मिनट तक टैक्सी में बिल्कुल खामोशी...
The House That Called My Name – वह घर जो मेरा नाम पुकारता था
आदित्य अपने ऑफिस से रोज़ देर रात लौटता था।
उसके घर के रास्ते में एक पुराना मकान पड़ता था।
मकान कई सालों से खाली था।
उसकी खिड़कियाँ टूटी हुई थीं।
दरवाज़े पर जंग लगा ताला था।
लेकिन हर रात जब आदित्य वहाँ से गुजरता, अंदर से कोई उसका नाम पुकारता—
"आदित्य..."
पहले उसने इसे हवा की आवाज़ समझा।
फिर एक रात आवाज़ ने उसका पूरा नाम लिया।
"आदित्य मेहरा, घर आ जाओ।"
घर के अंदर की रोशनी
अगली रात आदित्य उस मकान के सामने रुक गया।
अंदर से पीली रोशनी आ रही थी।
उसने खिड़की से झाँका।
एक बूढ़ी...
The Photograph Taken Tomorrow – कल खींची गई तस्वीर
ईशा को फोटोग्राफी का बहुत शौक था।
वह हर जगह तस्वीरें खींचती थी।
एक दिन उसे अपने पुराने कैमरे में एक ऐसी तस्वीर मिली, जो उसने कभी खींची ही नहीं थी।
तस्वीर में ईशा अपने कमरे में खड़ी थी।
उसके पीछे खिड़की के पास एक आदमी दिखाई दे रहा था।
आदमी का चेहरा धुंधला था।
तस्वीर के नीचे तारीख लिखी थी—
अगले दिन की।
तस्वीर में कौन था?
ईशा ने तस्वीर को ज़ूम करके देखा।
आदमी के हाथ में एक छोटा कागज़ था।
उस पर लिखा था—
"आज रात बाहर मत जाना।"
ईशा ने सोचा कि शायद कैमरे की तारीख गलत...
The Last Call from My Mother – माँ का आखिरी फोन
रोहन शहर में नौकरी करता था।
उसकी माँ गाँव में अकेली रहती थीं।
रोहन रोज़ रात को उनसे फोन पर बात करता था।
एक रात उसकी माँ ने फोन उठाते ही कहा—
"बेटा, आज घर जल्दी आ जाना।"
रोहन ने हँसकर पूछा—
"क्यों माँ?"
माँ ने धीमी आवाज़ में कहा—
"घर में कोई मेरे साथ रहता है।"
रोहन ने समझा कि माँ डर गई होंगी।
उसने अगले दिन गाँव आने का वादा किया।
रात के दो बजे
रोहन सोने ही वाला था कि फोन बजा।
स्क्रीन पर माँ का नाम था।
उसने कॉल उठाई।
माँ फुसफुसाकर बोलीं—
"बेटा, दरवाज़ा मत...
The Voice from the Water Tank – पानी की टंकी से आती आवाज़
मनीष अपने परिवार के साथ एक पुराने मकान में रहने आया था।
मकान की छत पर पानी की बड़ी टंकी थी।
पहले कुछ दिन सब सामान्य रहा।
फिर एक रात मनीष को छत से किसी के गाने की आवाज़ सुनाई दी।
वह ऊपर गया।
छत पर कोई नहीं था।
लेकिन पानी की टंकी के अंदर से आवाज़ आ रही थी।
एक बच्चा बहुत धीरे-धीरे गा रहा था।
टंकी के अंदर कौन था?
मनीष ने टंकी का ढक्कन उठाया।
अंदर साफ़ पानी था।
कोई बच्चा नहीं था।
उसने ढक्कन बंद कर दिया।
तभी अंदर से तीन बार दस्तक हुई।
ठक...
ठक...
ठक...
फिर आवाज़ आई—
"मुझे बाहर...
The Shadow in the School Bus – स्कूल बस में बैठी परछाई
पूजा हर सुबह अपनी बेटी अनाया को स्कूल बस में बैठाती थी।
बस में करीब बीस बच्चे थे।
ड्राइवर के पीछे वाली सीट हमेशा खाली रहती थी।
एक दिन अनाया स्कूल से लौटकर बहुत परेशान थी।
पूजा ने पूछा—
"क्या हुआ बेटा?"
अनाया ने कहा—
"मम्मी, आज बस में एक और बच्चा था।"
पूजा ने मुस्कुराकर पूछा—
"तो इसमें डरने की क्या बात है?"
अनाया ने धीरे से जवाब दिया—
"वह बच्चा किसी की आँखों में दिखाई नहीं देता था।"
खाली सीट पर कौन बैठता था?
अगले दिन पूजा ने बस के अंदर ध्यान से देखा।...
The Diary That Predicted Death – मौत की तारीख लिखने वाली डायरी
साहिल को पुरानी चीज़ें इकट्ठा करने का शौक था।
एक दिन उसे पुराने बाज़ार में चमड़े के कवर वाली एक डायरी मिली।
दुकानदार ने उसे डायरी बेचने से पहले चेतावनी दी—
"इसे पढ़ना, लेकिन इसमें कुछ लिखना मत।"
साहिल हँस पड़ा।
उसने डायरी खरीद ली।
घर पहुँचकर उसने पहला पन्ना खोला।
उस पर एक वाक्य लिखा था—
"हर इंसान की आखिरी तारीख पहले से लिखी जा चुकी है।"
पहला नाम
साहिल ने अगले पन्ने पलटे।
कई नाम और तारीखें लिखी थीं।
उसने एक नाम पहचाना।
वह उसके पड़ोसी मिश्रा अंकल का नाम था।
नाम के...
The Temple That Answered Prayers – वह मंदिर जो हर प्रार्थना का जवाब देता था
पहाड़ों के बीच एक छोटा-सा गाँव था।
गाँव के बाहर एक बहुत पुराना मंदिर था।
लोग कहते थे कि वहाँ माँगी गई हर इच्छा पूरी होती है।
लेकिन मंदिर के पुजारी की एक शर्त थी—
"सूरज डूबने के बाद मंदिर में अपनी इच्छा मत माँगना।"
गाँव के लोग इस नियम का पालन करते थे।
लेकिन निखिल इन बातों पर विश्वास नहीं करता था।
उसे लगता था कि यह सिर्फ़ लोगों को डराने का तरीका है।
निखिल की इच्छा
निखिल की छोटी बहन कई महीनों से बीमार थी।
उसका इलाज चल रहा था, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा था।
एक दिन निखिल...
The Man Who Lived Inside My Walls – मेरी दीवारों के अंदर रहने वाला आदमी
अमन ने नया फ्लैट खरीदा था।
फ्लैट छोटा था, लेकिन उसे पसंद था।
पहली कुछ रातें बिल्कुल सामान्य थीं।
फिर एक रात उसे दीवार के अंदर से खटखटाने की आवाज़ सुनाई दी।
ठक...
ठक...
ठक...
अमन ने सोचा कि शायद पड़ोसी कुछ काम कर रहे होंगे।
लेकिन आवाज़ उसके बेडरूम की उसी दीवार से आ रही थी, जिसके दूसरी तरफ कोई फ्लैट नहीं था।
दीवार के पीछे कौन था?
अगली रात आवाज़ फिर आई।
इस बार तीन बार खटखटाने के बाद किसी ने फुसफुसाकर कहा—
"लाइट बंद कर दो।"
अमन बिस्तर से उठ गया।
उसने कमरे की सारी लाइटें जला...
The Girl from Platform Zero – प्लेटफॉर्म ज़ीरो पर खड़ी लड़की
रात के करीब एक बजे विक्रम अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था।
स्टेशन लगभग खाली था।
आखिरी ट्रेन निकल चुकी थी।
तभी उसे दूर एक लड़की दिखाई दी।
वह लाल रंग की फ्रॉक पहने प्लेटफॉर्म के आखिरी छोर पर खड़ी थी।
विक्रम उसके पास गया और पूछा—
"तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो?"
लड़की ने उसकी तरफ देखा।
फिर धीरे से बोली—
"मैं अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रही हूँ।"
विक्रम ने स्टेशन की घड़ी देखी।
रात के एक बजकर तेरह मिनट हो रहे थे।
प्लेटफॉर्म नंबर कहाँ है?
विक्रम ने पूछा—
"तुम्हारी...
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