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The Shadow in the School Bus – स्कूल बस में बैठी परछाईपूजा हर सुबह अपनी बेटी अनाया को स्कूल बस में बैठाती थी। बस में करीब बीस बच्चे थे। ड्राइवर के पीछे वाली सीट हमेशा खाली रहती थी। एक दिन अनाया स्कूल से लौटकर बहुत परेशान थी। पूजा ने पूछा— "क्या हुआ बेटा?" अनाया ने कहा— "मम्मी, आज बस में एक और बच्चा था।" पूजा ने मुस्कुराकर पूछा— "तो इसमें डरने की क्या बात है?" अनाया ने धीरे से जवाब दिया— "वह बच्चा किसी की आँखों में दिखाई...0 Commentarios 0 Veces compartido 383 Visualizaciones¡Inicia sesión para dar me gusta, compartir y comentar!
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The Girl from Platform Zero – प्लेटफॉर्म ज़ीरो पर खड़ी लड़कीरात के करीब एक बजे विक्रम अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। स्टेशन लगभग खाली था। आखिरी ट्रेन निकल चुकी थी। तभी उसे दूर एक लड़की दिखाई दी। वह लाल रंग की फ्रॉक पहने प्लेटफॉर्म के आखिरी छोर पर खड़ी थी। विक्रम उसके पास गया और पूछा— "तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो?" लड़की ने उसकी तरफ देखा। फिर धीरे से बोली— "मैं अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रही हूँ।" विक्रम ने स्टेशन की घड़ी देखी। रात के एक...0 Commentarios 0 Veces compartido 293 Visualizaciones
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The Shadow Outside My Window – मेरी खिड़की के बाहर खड़ी परछाईकबीर एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता था। उसके कमरे की खिड़की सामने वाली इमारत की तरफ खुलती थी। हर रात ठीक 11:45 बजे उसे खिड़की के बाहर एक परछाई दिखाई देती। पहले उसने सोचा कि शायद किसी पेड़ की शाखा होगी। लेकिन एक रात उसने ध्यान से देखा। परछाई किसी इंसान की थी। लंबी। बिल्कुल स्थिर। और उसका चेहरा सीधे कबीर की खिड़की की तरफ था। हर रात वही समय कबीर ने कई दिनों तक उस परछाई को देखा। वह...0 Commentarios 0 Veces compartido 183 Visualizaciones
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The Train That Stopped at No Station – वह ट्रेन जो किसी स्टेशन पर नहीं रुकती थीरात के करीब बारह बजे रोहित दिल्ली से अपने घर लौट रहा था। आखिरी मेट्रो निकल चुकी थी। स्टेशन पर सिर्फ़ कुछ लोग बचे थे। तभी प्लेटफॉर्म पर एक अनाउंसमेंट हुई— "अगली ट्रेन कुछ ही देर में प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर आएगी।" रोहित हैरान था। प्लेटफॉर्म नंबर तीन तो पिछले दो साल से बंद था। उसने वहाँ देखा। अँधेरे के बीच एक ट्रेन धीरे-धीरे उसकी तरफ आ रही थी। उसकी खिड़कियों में कोई रोशनी नहीं थी। और...0 Commentarios 0 Veces compartido 258 Visualizaciones
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Coach Number 13 – डिब्बा नंबर 13 का यात्रीसौरभ रात की ट्रेन से अकेला सफर कर रहा था। उसकी सीट कोच नंबर 13 में थी। ट्रेन लगभग खाली थी। रात 1 बजे एक आदमी उसके सामने आकर बैठ गया। उसने कहा— "यह सीट मेरी है।" सौरभ ने टिकट देखा। उसकी सीट भी वही थी। दो टिकट सौरभ ने अपना टिकट दिखाया। आदमी ने जेब से टिकट निकाला। दोनों टिकटों पर एक ही सीट नंबर था। लेकिन उस आदमी के टिकट की तारीख... दस साल पुरानी थी। ट्रेन की...0 Commentarios 0 Veces compartido 104 Visualizaciones
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The House at the End of the Road – सड़क के आखिरी छोर वाला घरशहर से बाहर एक पुरानी सड़क थी। सड़क के आखिरी छोर पर एक अकेला घर खड़ा था। लोग उसे आखिरी घर कहते थे। अर्जुन को उस घर के बारे में पहली बार अपने दोस्त से पता चला। दोस्त ने कहा— "वहाँ कभी मत जाना।" अर्जुन ने पूछा— "क्यों?" दोस्त ने सिर्फ़ इतना कहा— "क्योंकि जो अंदर जाता है, वह वापस आने से पहले बदल जाता है।" घर की पहली झलक एक रात अर्जुन अपनी कार से उसी रास्ते पर जा...0 Commentarios 0 Veces compartido 140 Visualizaciones
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The Basement Ward – अस्पताल के नीचे वाला कमरापुराने अस्पतालों में कई कमरे ऐसे होते हैं जिनका इस्तेमाल बंद हो चुका होता है। लेकिन शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का बेसमेंट... कई सालों से पूरी तरह बंद था। रोहित वहाँ रात की सिक्योरिटी ड्यूटी करता था। एक रात CCTV पर उसे बेसमेंट का दरवाज़ा खुलता दिखाई दिया। बंद दरवाज़ा रोहित ने मैनेजर को फोन किया। मैनेजर ने कहा— "बेसमेंट में मत जाना।" रोहित ने पूछा— "लेकिन दरवाज़ा खुला...0 Commentarios 0 Veces compartido 120 Visualizaciones
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The Locked Flat – बंद फ्लैट के अंदर कौन था?शहर की ऊँची इमारतों में हर फ्लैट की अपनी कहानी होती है। लेकिन कुछ दरवाज़े ऐसे होते हैं जिन्हें खोलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अमन ने जब नई सोसाइटी में फ्लैट लिया, तो उसे सामने वाले बंद फ्लैट के बारे में कुछ पता नहीं था। उसके फ्लैट के ठीक सामने नंबर 804 था। दरवाज़े पर मोटा ताला लगा था। सोसाइटी के गार्ड ने सिर्फ़ इतना कहा— "साहब, उस फ्लैट के बारे में मत पूछना।" अमन हँस दिया। उसे लगा शायद...0 Commentarios 0 Veces compartido 185 Visualizaciones
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The Last Train – आखिरी ट्रेन में कौन बैठा था?रात के सफर में सबसे डरावनी चीज़ हमेशा अंधेरा नहीं होता। कभी-कभी डर उस इंसान से होता है जो आपके बिल्कुल पास बैठा हो। राहुल को यह बात उस रात समझ आई जब उसे शहर के पुराने रेलवे स्टेशन से आखिरी ट्रेन पकड़नी पड़ी। रात के करीब 11:50 बजे स्टेशन लगभग खाली हो चुका था। प्लेटफॉर्म पर सिर्फ़ कुछ बंद दुकानें, पीली रोशनी वाले बल्ब और दूर खड़ी एक पुरानी ट्रेन दिखाई दे रही थी। अनाउंसमेंट हुआ— "प्लेटफॉर्म...0 Commentarios 0 Veces compartido 305 Visualizaciones
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The Book That Remembered Me – वह किताब जो मुझे जानती थीशहर की पुरानी लाइब्रेरी में आदित्य को एक ऐसी किताब मिली, जिस पर कोई नाम नहीं लिखा था। किताब बाकी किताबों से अलग थी। उसका कवर बिल्कुल काला था और उस पर सिर्फ़ एक छोटा-सा नंबर लिखा था— 27 आदित्य ने किताब खोली। पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक वाक्य था— "आदित्य ने यह किताब रात 11:46 बजे खोली।" वह चौंक गया। घड़ी में सचमुच 11:46 बज रहे थे। उसने अगला पन्ना पलटा। वहाँ लिखा था— "अब वह पीछे...0 Commentarios 0 Veces compartido 521 Visualizaciones
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