कबीर एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता था।
उसके कमरे की खिड़की सामने वाली इमारत की तरफ खुलती थी।
हर रात ठीक 11:45 बजे उसे खिड़की के बाहर एक परछाई दिखाई देती।
पहले उसने सोचा कि शायद किसी पेड़ की शाखा होगी।
लेकिन एक रात उसने ध्यान से देखा।
परछाई किसी इंसान की थी।
लंबी।
बिल्कुल स्थिर।
और उसका चेहरा सीधे कबीर की खिड़की की तरफ था।
हर रात वही समय
कबीर ने कई दिनों तक उस परछाई को देखा।
वह...