रात के करीब बारह बजे रोहित दिल्ली से अपने घर लौट रहा था।
आखिरी मेट्रो निकल चुकी थी।
स्टेशन पर सिर्फ़ कुछ लोग बचे थे।
तभी प्लेटफॉर्म पर एक अनाउंसमेंट हुई—
"अगली ट्रेन कुछ ही देर में प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर आएगी।"
रोहित हैरान था।
प्लेटफॉर्म नंबर तीन तो पिछले दो साल से बंद था।
उसने वहाँ देखा।
अँधेरे के बीच एक ट्रेन धीरे-धीरे उसकी तरफ आ रही थी।
उसकी खिड़कियों में कोई रोशनी नहीं थी।
और...