शहर के पुराने बाज़ार में एक छोटी-सी घड़ी की दुकान थी।
आरव वहाँ अपनी दादाजी की पुरानी घड़ी ठीक करवाने गया।
दुकानदार ने घड़ी हाथ में लेते ही पूछा—
"यह घड़ी तुम्हें कहाँ मिली?"
आरव ने कहा—
"मेरे दादाजी की है।"
दुकानदार कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
"इसे ठीक करवाने की कोशिश मत करना।"
आरव हँस पड़ा।
"क्यों?"
दुकानदार ने घड़ी वापस कर दी।
"क्योंकि यह समय बताती नहीं है..."
उसने धीरे से...
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