Mises à jour récentes
  • The Last Show – आखिरी शो का टिकट
    शहर का नटराज सिनेमा पिछले आठ साल से बंद पड़ा था। काँच टूट चुके थे, पोस्टर फट चुके थे और टिकट खिड़की पर जंग लग चुकी थी। फिर भी हर शुक्रवार रात 11 बजे वहाँ एक फिल्म चलती थी। कम से कम रवि ने ऐसा सुना था। उसे यह बात अफवाह लगी। एक शुक्रवार वह कैमरा लेकर सिनेमा के बाहर पहुँच गया। रात के 11 बज चुके थे। अचानक अंदर से फिल्म चलने की आवाज़ आई। रवि ने टूटा हुआ दरवाज़ा धकेला और अंदर चला गया। पूरा हॉल अंधेरे...
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  • The Unclaimed Suitcase – स्टेशन पर पड़ा आखिरी सूटकेस
    सुबह के 5 बजे नमन रेलवे स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। प्लेटफॉर्म लगभग खाली था। तभी उसकी नजर एक काले रंग के सूटकेस पर पड़ी। वह अकेला पड़ा था। न कोई मालिक। न कोई पहचान। नमन ने स्टेशन मास्टर को बताने के लिए सूटकेस उठाया। उठाते ही उसे अंदर से हल्की-सी आवाज़ सुनाई दी। टक... टक... जैसे कोई अंदर से ढक्कन पर उंगली मार रहा हो। नमन ने सूटकेस नीचे रख दिया।     स्टेशन मास्टर ने उसे...
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  • The Clock That Stopped Time – वह घड़ी जो समय रोक देती थी
    शहर के पुराने बाज़ार में एक छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। आरव वहाँ अपनी दादाजी की पुरानी घड़ी ठीक करवाने गया। दुकानदार ने घड़ी हाथ में लेते ही पूछा— "यह घड़ी तुम्हें कहाँ मिली?" आरव ने कहा— "मेरे दादाजी की है।" दुकानदार कुछ पल चुप रहा। फिर बोला— "इसे ठीक करवाने की कोशिश मत करना।" आरव हँस पड़ा। "क्यों?" दुकानदार ने घड़ी वापस कर दी। "क्योंकि यह समय बताती नहीं है..." उसने धीरे से...
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  • The Photograph From Tomorrow – कल की तस्वीर
    राहुल एक पुराने फोटो स्टूडियो में अपनी पासपोर्ट फोटो खिंचवाने गया। स्टूडियो काफी पुराना था। दीवारों पर सैकड़ों तस्वीरें लगी थीं। फोटो खींचने के बाद दुकानदार ने कहा— "पाँच मिनट में प्रिंट मिल जाएगा।" राहुल कुर्सी पर बैठकर इंतज़ार करने लगा। तभी उसकी नजर दीवार पर लगी एक तस्वीर पर पड़ी। उसमें राहुल खुद खड़ा था। वह चौंक गया। "ये फोटो कब ली आपने?" दुकानदार ने तस्वीर देखी और उसका चेहरा बदल गया।...
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  • Room 309 – बंद होटल का कमरा
    शहर के बाहर एक पुराना होटल था, जो कई सालों से बंद पड़ा था। मोहित वहाँ रात में फोटो लेने गया। होटल की तीसरी मंज़िल पर एक कमरा था— 309 दरवाज़ा आधा खुला था। मोहित ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई और अंदर चला गया। कमरे में धूल थी, लेकिन बेड बिल्कुल साफ़ था। तकिए पर एक छोटा कागज़ रखा था— "आज रात यहाँ मत सोना।" मोहित हँस पड़ा। "किसी ने मज़ाक किया है।" उसने कागज़ जेब में रख लिया।  ...
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  • The Thirteenth Floor – तेरहवीं मंज़िल की लिफ्ट
    अमन जिस ऑफिस में काम करता था, वहाँ सिर्फ़ 12 मंज़िलें थीं। लेकिन एक रात उसे ऑफिस में देर हो गई। करीब 11:40 बजे वह लिफ्ट में अकेला खड़ा था। उसने Ground Floor का बटन दबाया। लिफ्ट नीचे जाने लगी। 12... 11... 10... तभी लिफ्ट अचानक रुक गई। डिस्प्ले पर नंबर आया— 13 अमन ने घबराकर बटन दबाए। "यह कैसे हो सकता है?" लिफ्ट का दरवाज़ा खुल गया। बाहर एक लंबा अंधेरा गलियारा था। अमन ने बाहर कदम नहीं रखा।...
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  • The Man in the Mirror – आईने में दिखने वाला आदमी
    रात के करीब 10 बजे विवेक को अचानक बाल कटवाने की जरूरत पड़ गई। बाज़ार लगभग बंद हो चुका था। तभी उसे एक छोटी-सी पुरानी नाई की दुकान दिखाई दी। बाहर कोई बोर्ड नहीं था। बस दरवाज़े पर लिखा था— "अंदर आइए।" विवेक अंदर चला गया। दुकान में एक बूढ़ा नाई बैठा था। उसने बिना कुछ पूछे कुर्सी की तरफ इशारा किया। विवेक बैठ गया। सामने बड़ा आईना था।     नाई ने बाल काटने शुरू किए। विवेक ने आईने में...
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  • The Midnight Broadcast – आधी रात का रेडियो संदेश
    शहर के पुराने रेडियो स्टेशन को बंद हुए लगभग पंद्रह साल हो चुके थे। फिर भी हर रात 12:03 बजे एक पुरानी FM frequency पर कुछ सेकंड के लिए आवाज़ आती थी। आर्यन को पुराने रेडियो इकट्ठा करने का शौक था। एक रात उसने वही frequency खोज ली। रेडियो में अचानक खरखराहट हुई। फिर एक आदमी की धीमी आवाज़ सुनाई दी— "अगर आप मेरी आवाज़ सुन रहे हैं, तो घर से बाहर मत निकलना।" आर्यन हँस पड़ा। उसे लगा कोई पुरानी...
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  • The Empty Photo Booth – खाली फोटो बूथ
    शहर के पुराने मेले में करण को एक बंद पड़ा फोटो बूथ दिखाई दिया। बूथ के ऊपर सिर्फ़ एक लाइन लिखी थी— "एक फोटो ₹20 — भविष्य मुफ्त।" करण हँसा और अंदर चला गया। उसने सिक्का डाला। कैमरे की फ्लैश चमकी। कुछ सेकंड बाद फोटो बाहर आई। करण ने फोटो देखी। उसमें वह बूथ के अंदर बैठा था। लेकिन फोटो के पीछे एक आदमी खड़ा था। करण ने तुरंत पीछे देखा। कोई नहीं था।     उसने दूसरी फोटो खिंचवाई। इस...
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  • The Last Reader – आखिरी पाठक
    शहर की पुरानी लाइब्रेरी रात 10 बजे बंद हो जाती थी। लेकिन सुमित, जो वहाँ नाइट सिक्योरिटी करता था, एक अजीब चीज़ नोटिस करता था। हर रात ठीक 11:30 बजे लाइब्रेरी की तीसरी मंज़िल पर एक कुर्सी अपने आप खिसकती थी। पहली बार उसने सोचा कि शायद चूहा होगा। दूसरी रात उसने ऊपर जाकर देखा। कुर्सी खाली थी। लेकिन उसके सामने एक किताब खुली हुई थी। किताब के पन्ने पर लिखा था— "आज सुमित ऊपर आएगा।" सुमित के हाथ से...
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